जी रामजी विधेयक-ग्रामीण रोजगार का नया संकल्प, सांसद डॉ. अनिल बोंडे का प्रतिपादन

Tribal Employment: सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने ‘विकसित भारत 2047’ के विजन के तहत वीबी–जी राम जी विधेयक को ग्रामीण रोजगार का नया संकल्प बताया।
Dr Anil Bonde
Tribal Employment:सांसद डॉ. अनिल बोंडे (सोर्सः सोशल मीडिया)
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Amravati News: ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप ग्रामीण विकास को नई दिशा देने के लिए वीबीजी राम जी (VB-G RAM G) विधेयक प्रस्तुत किया गया है। यह विधेयक ग्रामीण रोजगार का एक नया संकल्प है। ऐसा प्रतिपादन अभियान के महाराष्ट्र आयोजक एवं सांसद डॉ. अनिल बोंडे ने किया।

इस संदर्भ में आयोजित पत्रकार परिषद में विधायक राजेश वानखडे, विधायक प्रताप अडसड, विधायक केवलराम काले, विधायक राजेश बकाने, प्रभुदास भिलावेकर, ग्रामीण जिलाध्यक्ष रविराज देशमुख तथा धारणी नगराध्यक्ष सुनील चौथमल उपस्थित थे।

गरीब नागरिक को रोजगार मिले

डॉ. अनिल बोंडे ने कहा कि प्रत्येक गरीब नागरिक को रोजगार मिले, उसके श्रम की गरिमा बनी रहे तथा समाज के गरीब, आदिवासी और पिछड़े वर्ग मुख्यधारा में आएं। यही इस कानून का मूल उद्देश्य है। यह विधेयक महात्मा गांधी के विचारों के अनुरूप है और रामराज्य की संकल्पना से प्रेरित होकर सर्वसमावेशी विकास के लिए लाया गया है। विधेयक के तहत प्रत्येक ग्रामीण परिवार को वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी गई है। वन क्षेत्रों में कार्य करने वाले अनुसूचित जनजाति (ST) श्रमिकों को अतिरिक्त 25 दिनों का रोजगार मिलेगा। नई योजना में कार्यदिवस बढ़ाए गए हैं और मजदूरी का भुगतान साप्ताहिक करने का प्रावधान किया गया है, जबकि पहले मनरेगा में 15 दिनों के भीतर मजदूरी दी जाती थी।

कुल 11.74 लाख करोड़ रुपए

डॉ. बोंडे ने बताया कि मनरेगा योजना के अंतर्गत अब तक कुल 11.74 लाख करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, जिनमें से 8.53 लाख करोड़ रुपये मोदी सरकार के कार्यकाल में व्यय हुए हैं। यह ग्रामीण विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि रोजगार योजनाओं की शुरुआत महात्मा गांधी के नाम से नहीं हुई थी। वर्ष 1980 में इंदिरा गांधी ने विभिन्न रोजगार योजनाओं को एकत्र कर ‘राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम’ शुरू किया, जिसे बाद में राजीव गांधी ने ‘जवाहर रोजगार योजना’ नाम दिया। वर्ष 2004 में सोनिया-मनमोहन सरकार ने इसे नरेगा और 2005 में मनरेगा बनाया। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कांग्रेस सरकार ने जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला, तो क्या वह पंडित जवाहरलाल नेहरू का अपमान नहीं था?

रोजगार योजना का पुनर्गठन आवश्यक

डॉ. बोंडे ने कहा कि 2005 में मनरेगा की शुरुआत के बाद ग्रामीण भारत में बड़ा बदलाव आया है। ग्रामीण गरीबी 2001–12 में 25.7 प्रतिशत से घटकर 2023–24 में 4.86 प्रतिशत रह गई है। कनेक्टिविटी बढ़ी है और आजीविका के नए अवसर बने हैं। इसलिए 2025 की आवश्यकताओं के अनुसार रोजगार योजना का पुनर्गठन जरूरी था।

नए कानून के तहत आधार आधारित रियल-टाइम डेटा अपलोड, GPS और मोबाइल मॉनिटरिंग तथा धोखाधड़ी पहचान प्रणाली लागू की जाएगी, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और सही लाभार्थियों तक लाभ पहुंचेगा। उन्होंने बताया कि बुआई और कटाई के समय 60 दिनों तक कार्य रोकने का प्रावधान किया गया है, ताकि उस अवधि में खेत मजदूरों की कमी न हो,मनरेगा में ऐसी व्यवस्था नहीं थी।

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