सूखा रहा मृग नक्षत्र, बारिश की कमी से अकोला में उड़द-मूंग की बुआई संकट में, किसान चिंतित
Urad Sowing Crisis: अकोला जिले में मानसून की देरी और मृग नक्षत्र के सूखा रहने से उड़द और मूंग की बुआई संकट में आ गई है। किसानों ने खरीफ सीजन की तैयारी पूरी कर ली है।
Kharif Season (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Akola Rain News: अकोला जिले भर के किसान रोहिणी और मृग नक्षत्र के सूख जाने से बहुत परेशान हैं तथा चिंतित दिखाई दे रहे हैं। मृग नक्षत्र में उड़द और मूंग की बुआई करना बहुत ज़रूरी है लेकिन, बारिश न होने से इस बुआई में काफी देरी हो गई है। इस वजह से महंगे बीज घर लाने वाले किसान अब चिंता में हैं और उनकी नज़रें अब आसमान पर टिकी हैं कि कब बादल आते हैं और बरसते हैं।
सोमवार से मृग नक्षत्र समाप्त हो गया है और आर्द्रा नक्षत्र शुरू हो गया है, और शुरुआत में ही अच्छी बारिश होनी चाहिए थी लेकिन अभी तक बारिश नहीं हुई है। जिले की सभी तहसीलों में किसानों ने हज़ारों हेक्टेयर ज़मीन खरीप की बुआई के लिए तैयार कर ली है। जिन किसानों के पास सिंचाई की सुविधा है, उन्होंने जून की शुरुआत में ही कपास की बुआई कर दी थी।
घट गया जलस्तर
घट गया जलस्तर लेकिन, गर्मियों में पारा बढ़ने से कुओं और बोरवेल में पानी का स्तर काफ़ी नीचे चला गया है। इसलिए किसानों को कपास को ज़िंदा रखने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है, और कपास के पौधे पीले पड़कर सूख रहे हैं। अगर आर्द्रा नक्षत्र की शुरुआत में बारिश नहीं हुई तो इस क्षेत्र में उड़दमूंग की फसल खत्म होने का डर है।
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उड़द और मूंग की फसल खतरे में
अभी कुछ तहसीलों में बंजर ज़मीन पर फसलों की जगह मिट्टी की धूल उड़ती दिख रही है। ऐसे में किसानों के पास सोयाबीन, अरहर और कपास के अलावा कोई दूसरा पर्याय नहीं है। जो किसान पहले से ही कर्ज में डूबे हुए थे, उन्होंने किसी तरह कर्ज लेकर बीज और खाद खरीदी है। उन्हें उम्मीद थी कि इस साल पिछले साल के नुकसान की भरपाई हो जाएगी, लेकिन बारिश के मुंह मोड़ लेने से किसान निराश हो गए हैं।
बारिश के लिए भगवान से प्रार्थना
जिले के किसान और नागरिक भारी बारिश के लिए भगवान से प्रार्थना कर रहे हैं। कोई धोंडी धोंडी पानी दे कह रहा है। तो कोई खाना चढ़ाते और पूजा करते दिख रहा है। जिले के सभी गांवों में बारिश के लिए भगवान से प्रार्थना करने के लिए कई तरह के प्रयास किए जा रहे हैं।
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घट सकता है फसलों का उत्पादन
कृषि उपज बाजार समिति के सभापति शिरीश धोत्रे ने कहा कि, इस वर्ष मानसून की बारिश में काफी देरी हो रही है। देखा जाए तो यह समय मूंग और उड़द की फसलों की बुवाई का है लेकिन बारिश का पता नहीं है। उन्होंने कहा कि, कम से कम जुलाई माह के पहले सप्ताह में खेतों में बुवाई का काम पूरा हो जाना चाहिए।
यदि इसी प्रकार की स्थिति रही तो निश्चित ही सोयाबीन तथा अन्य फसलों का उत्पादन घटने की संभावना से इन्कार नहीं किया जा सकता है। यदि ऐसी ही स्थिति रही तो मूंग और उड़द की बुवाई ही नहीं हो सकेगी। किसान समुचित बारिश होने के बाद ही बुवाई की शुरूवात करेंगे। उन्होंने यह स्वीकार किया कि इन दिनों किसान वर्ग में बारिश को लेकर चिंता का वातावरण है।
