Makar Sankranti 2026:अकोला पुरोहित संघ (सोर्सः सोशल मीडिया)
Akola Purohit Sangh: अन्य पर्वों की तरह इस वर्ष भी मकर संक्रांति की तिथि को लेकर लोगों में भ्रम की स्थिति बनी हुई है। कई स्थानों पर यह प्रचार किया जा रहा है कि मकर संक्रांति 15 जनवरी को मनाई जाएगी। इस भ्रामक प्रचार को निरस्त करते हुए अकोला पुरोहित संघ के पंडित रवि कुमार शर्मा ने स्पष्ट किया कि मकर संक्रांति का पर्व 14 जनवरी को ही मनाया जाएगा।
पंडित शर्मा ने बताया कि केवल महाराष्ट्र ही नहीं, बल्कि संपूर्ण भारत के अधिकांश भागों में मकर संक्रांति की तिथि 14 जनवरी ही रहेगी। महाराष्ट्रीयन पंचांग, निर्णय सागर, सम्राट, वल्लभ मनीराम, जय विनोदी और अन्य कई दिनदर्शिकाओं में भी यही तिथि दर्शाई गई है।
पंडित शर्मा ने समझाया कि मकर संक्रांति सूर्य के धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करने को कहते हैं। इस प्रवेश के समय को संक्रांति काल कहा जाता है। इस वर्ष सूर्य का मकर राशि में प्रवेश 14 जनवरी, बुधवार को दोपहर 3 बजकर 6 मिनट पर होगा। यदि सूर्य का प्रवेश सूर्यास्त के बाद होता तो संक्रांति 15 जनवरी को मानी जाती, लेकिन इस बार ऐसा नहीं है। इसलिए मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही रहेगी।
पंडित शर्मा ने बताया कि पुण्यकाल दोपहर 3:06 बजे से आरंभ होगा। इस समय स्नान, दान और पूजा का विशेष महत्व है। कुछ लोग इस अवसर पर बायना या तेरुंडा का संकल्प लेते हैं और संक्रांति लगने तक जल या चाय ग्रहण नहीं करते। यदि कोई व्यक्ति भूखा-प्यासा रहने में असमर्थ है तो वह 14 जनवरी को सुबह 9 बजे के बाद संकल्प कर सकता है। जय विनोदी पंचांग में इसकी व्यवस्था स्पष्ट रूप से दी गई है।
अकोला पुरोहित संघ ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार के भ्रामक प्रचार में न पड़ें और मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही मनाएं। यह पर्व सूर्य उपासना और दान-पुण्य का विशेष अवसर है। संक्रांति के दिन तिल, गुड़, खिचड़ी और वस्त्र दान करने की परंपरा है। साथ ही इस दिन स्नान और सूर्य को अर्घ्य देने का विशेष महत्व है।
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मकर संक्रांति को पूरे भारत में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। उत्तर भारत में इसे खिचड़ी पर्व कहा जाता है, दक्षिण भारत में पोंगल के रूप में मनाया जाता है, और गुजरात एवं राजस्थान में पतंग उत्सव आयोजित होता है। महाराष्ट्र में तिलगुल का आदान-प्रदान कर लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं।
पंडित शर्मा ने कहा कि मकर संक्रांति केवल धार्मिक पर्व ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और भाईचारे का प्रतीक भी है। सूर्य के उत्तरायण होने से दिन बड़े होने लगते हैं और इसे शुभ कार्यों की शुरुआत का काल माना जाता है। अकोला पुरोहित संघ ने स्पष्ट किया कि मकर संक्रांति 14 जनवरी को ही मनाई जाएगी। नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे संक्रांति के पुण्यकाल में स्नान, दान और पूजा कर धर्मलाभ प्राप्त करें तथा भ्रम फैलाने वाली बातों से दूर रहें।