Akola Patur Khetri Village News: स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांवों में घनकचरा व्यवस्थापन के लिए लाखों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन पातुर तहसील के खेट्री गांव में इस योजना के क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। ग्रामीणों ने किए गए कार्यों की गुणवत्ता पर नाराज़गी जताते हुए इसे तकनीकी मानकों के विपरीत बताया है।
ग्रामीणों के अनुसार, ग्राम पंचायत को प्राप्त निधि का उद्देश्य गांव में कचरा संकलन, वर्गीकरण और निस्तारण के लिए एक स्थायी एवं वैज्ञानिक व्यवस्था विकसित करना था। इसके तहत कचरा संग्रहण केंद्र, प्रक्रिया इकाई और स्वच्छता से जुड़ी आधारभूत संरचना तैयार की जानी थी। हालांकि, जमीनी स्तर पर स्थिति इसके विपरीत नजर आ रही है।
बताया जा रहा है कि कई स्थानों पर कार्य अधूरा छोड़ दिया गया है, जबकि जहां निर्माण किया गया है, वहां घटिया सामग्री के उपयोग के आरोप लगाए जा रहे हैं। उचित तकनीकी निगरानी और नियोजन के अभाव में यह परियोजना अपने उद्देश्य से भटकती दिखाई दे रही है। परिणामस्वरूप, गांव में स्वच्छता व्यवस्था मजबूत होने के बजाय अस्वच्छता का माहौल बनता जा रहा है, जिससे सार्वजनिक स्वास्थ्य पर भी खतरा उत्पन्न हो सकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब लाखों रुपये की सार्वजनिक निधि खर्च की जा रही है, तब कार्य की गुणवत्ता, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होना आवश्यक है। इसके अभाव में न केवल योजना का उद्देश्य विफल हो रहा है, बल्कि सरकारी संसाधनों के दुरुपयोग की आशंका भी बढ़ रही है।
इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिला परिषद के वरिष्ठ अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि कार्यों की तकनीकी जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि कहीं अनियमितता या लापरवाही तो नहीं हुई है। यदि जांच में दोष सिद्ध होता है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और ठेकेदारों पर प्रशासनिक कार्रवाई की जाए।
साथ ही, यदि यह पाया जाता है कि सार्वजनिक निधि का दुरुपयोग हुआ है, तो उसकी वसूली सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों ने प्रशासन से इस मामले में त्वरित कार्रवाई की अपेक्षा जताते हुए कहा है कि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो स्थिति और गंभीर हो सकती है।