एक ही रात में 80 से अधिक भेड़ों की मौत, 40 Mअब भी बीमार, पशुपालक पर टूटा आर्थिक संकट
Mysterious Sheep Deaths: अकोला जिले के पातुर तहसील के तांदली बु. क्षेत्र में एक पशुपालक की 80 से अधिक भेड़ों की एक ही रात में रहस्यमयी परिस्थितियों में मौत हो गई, जबकि करीब 40 भेड़ें अब भी बीमार हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
Sheep Deaths (सोर्सः फाइल फोटो-सोशल मीडिया)
Akola Animal Husbandry Department: पातुर तहसील के तांदली बु। क्षेत्र में एक पशुपालक के भेड़ों के झुंड में अचानक बीमारी फैलने से 80 से अधिक भेड़ों की मौत हो गई, जबकि करीब 40 भेड़ें अब भी बीमार अवस्था में हैं। इस घटना से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मच गया है और पशुपालक को लाखों रुपये के आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। भेड़ों की मौत का वास्तविक कारण अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पशुपालक हरिभाऊ शिंगोले अपने लगभग 120 भेड़ों के झुंड के साथ तांदली बु। गांव के बाहर एक खेत में डेरा डालकर रह रहे थे।
शनिवार की रात से अचानक भेड़ें बीमार पड़ने लगीं और कुछ ही घंटों में बड़ी संख्या में उनकी मौत होने लगी। अगले दिन सुबह तक 80 से अधिक भेड़ें मर चुकी थीं, जबकि शेष भेड़ों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है। घटना की जानकारी मिलते ही पशुसंवर्धन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और मृत भेड़ों का पोस्टमार्टम कर आवश्यक नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों का पता चल सकेगा। प्राथमिक अनुमान के अनुसार विषैली वनस्पति खाने, दूषित चारे या किसी प्रकार की विषबाधा के कारण यह घटना होने की आशंका जताई जा रही है।
उपचार में लापरवाही का आरोप
घटना के बाद स्थानीय नागरिकों और पशुपालकों ने आरोप लगाया है कि इतनी बड़ी संख्या में पशुधन प्रभावित होने के बावजूद पशु चिकित्सा विभाग की ओर से तत्काल विशेष चिकित्सा शिविर या पर्याप्त उपचार व्यवस्था उपलब्ध नहीं कराई गई। बीमार भेड़ों के इलाज में अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाए जाने को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी है। मामले में हरिभाऊ शिंगोले ने पातुर पुलिस थाने में शिकायत दर्ज कराई है। राजस्व विभाग और पशुसंवर्धन विभाग की ओर से पंचनामा किया गया है तथा नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
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विषबाधा या बीमारी? पशुसंवर्धन विभाग कर रहा जांच
सरकार को आर्थिक सहायता का प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। चूंकि हरिभाऊ शिंगोले का पूरा परिवार भेड़ पालन व्यवसाय पर निर्भर है, इसलिए एक ही रात में झुंड के अधिकांश पशुओं की मौत से उन पर भारी आर्थिक संकट आ गया है। ग्रामीणों और पशुपालकों ने सरकार से तत्काल आर्थिक सहायता देने तथा भेड़ों की मौत के वास्तविक कारणों की गहन जांच करने की मांग की है। पशु चिकित्सा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रयोगशाला की अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद ही भेड़ों की मौत के सही कारण स्पष्ट हो सकेंगे। इसके लिए सभी नमूने जांच हेतु भेज दिए गए हैं।
