अकोला में राजनीतिक भूकंप: बजट बैठक में भारी हंगामा, महापौर ने 16 नगरसेवकों को किया सस्पेंड
Akola Municipal Corporation Suspension: अकोला नगर निगम में बजट बैठक के दौरान हंगामे पर महापौर शारदा खेडकर ने 16 विपक्षी नगरसेवकों को निलंबित किया। महाराष्ट्र की राजनीति में मची खलबली।
- Written By: अनिल सिंह
Sharda Khedkar Mayor Akola Municipal Corporation (फोटो क्रेडिट-X)
Sharda Khedkar Mayor: महाराष्ट्र के अकोला से एक बड़ी राजनीतिक खबर सामने आई है, जहाँ स्थानीय नगर निगम की बजट बैठक में भारी हंगामे के बाद महापौर शारदा खेडकर ने एक ऐतिहासिक और कठोर कदम उठाया है। अकोला नगर निगम के इतिहास में पहली बार, विपक्षी दलों के 16 नगरसेवकों को एक साथ निलंबित (Suspend) कर दिया गया है। इन नगरसेवकों को आगामी तीन बैठकों के लिए सदन की कार्यवाही से बाहर रखा जाएगा।
इस कार्रवाई ने न केवल अकोला बल्कि पूरे महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में खलबली मचा दी है।
बजट बैठक में ‘घंटागाड़ी’ और ’50 खोके’ पर संग्राम
अकोला नगर निगम की बजट बैठक के दौरान विपक्षी नगरसेवक शहर में ‘घंटागाड़ियों’ (कचरा उठाने वाली गाड़ियाँ) को मुफ्त में जारी रखने की मांग कर रहे थे। इसी चर्चा के दौरान सत्ताधारी पक्ष के एक सदस्य द्वारा कथित तौर पर ‘असंविधानिक शब्दों’ का इस्तेमाल किया गया, जिससे सदन का माहौल गरमा गया। विपक्षी दल—वंचित बहुजन अघाड़ी (VBA), कांग्रेस और शिवसेना (UBT) के नगरसेवक महापौर के सामने वेल में आकर ठिय्या आंदोलन पर बैठ गए। आंदोलन के दौरान ’50 खोके, एकदम ओके’ जैसे नारों से सदन गूँज उठा।
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महापौर की चेतावनी और पुलिस की एंट्री
महापौर शारदा खेडकर ने बार-बार विपक्षी सदस्यों को अपनी सीटों पर लौटने और कार्यवाही चलने देने की अपील की। सत्ताधारी पक्ष द्वारा विवादित शब्दों पर माफी मांगे जाने के बाद भी जब विपक्ष का हंगामा शांत नहीं हुआ, तो महापौर ने आक्रामक रुख अपनाते हुए निलंबन का आदेश जारी कर दिया। आदेश के बावजूद जब नगरसेवक सदन से बाहर नहीं गए, तो पुलिस को बुलाना पड़ा। महापौर ने नियमों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया कि सदन की गरिमा बनाए रखना उनकी प्राथमिकता है और अनुशासनहीनता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
विपक्ष का पलटवार: “हम जनता के सैनिक हैं”
निलंबित किए गए नगरसेवकों में पराग गवई, नीलेश देव और जिशान हुसेन जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। विपक्षी नेताओं ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र की हत्या करार दिया है। वंचित बहुजन अघाड़ी के नगरसेवक पराग गवई ने कहा, “सत्ताधारी पक्ष ने खुद विवाद शुरू किया और अब जनहित की आवाज उठाने पर हमें दबाया जा रहा है। हम बाबासाहेब अंबेडकर के सैनिक हैं और जनता के हक की लड़ाई जारी रखेंगे।” विपक्ष का आरोप है कि सत्ताधारी दल ने बजट के मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए यह पूरी साजिश रची है।
