“अकोला सरकारी दफ्तरों में लापरवाही, कर्मचारी समय पर नहीं, नागरिक परेशान”
Akola News: अकोला के सरकारी कार्यालयों में कर्मचारी समय पर नहीं आते, जिससे दूर-दराज से आने वाले नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में नागरिकों ने कार्रवाई की मांग की है।
- Written By: रूपम सिंह
सरकारी कार्यालयों में कर्मचारी (AI Generated Image)
Public Service Issues News: राज्य सरकार ने कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने और नागरिकों के काम समय पर निपटाने के उद्देश्य से सरकारी कार्यालयों का कार्य सप्ताह पाँच दिन का किया है तथा कामकाज का समय सुबह 10 से शाम 6 बजे तक निर्धारित किया है। लेकिन अकोला के विभिन्न शासकीय कार्यालयों में इसका उल्टा चित्र दिखाई दे रहा है।
शासकीय कार्यालयों की लापरवाही उजागर
अधिकारी और कर्मचारी समय पर उपस्थित नहीं रहते, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिला परिषद अकोला कार्यालय में कई कर्मचारी शुक्रवार दोपहर बाद ही घर जाने की जल्दी में रहते हैं। वीकेंड मनाने के लिए शुक्रवार को समय से पहले कार्यालय छोड़ने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। नियमों के अनुसार किसी भी कर्मचारी को कार्यालयीन समय में बाहर जाने पर हलचल पंजीयनबुक में दर्ज करना अनिवार्य है,
लेकिन जिलाधिकारी कार्यालय, जिला परिषद, तहसील, पंचायत समिति, सार्वजनिक निर्माण कार्य विभाग, दुय्यम निबंधक, स्वास्थ्य उपसंचालक कार्यालय, मजीप्रा, सिंचाई विभाग, कृषि अधीक्षक कार्यालय, सहायक निबंधक और जलापूर्ति कार्यालय में इस नियम की खुलेआम अनदेखी हो रही है। कई कार्यालयों की पंजीयनबुक धूल खा रही हैं और वरिष्ठ अधिकारियों को कर्मचारियों की गतिविधियों का कोई पता नहीं होता। लंच ब्रेक आधे घंटे का निर्धारित होने के बावजूद कर्मचारी डेढ़ घंटे तक गायब रहते हैं।
सम्बंधित ख़बरें
नांदगांव खंडेश्वर में महिला से यौन शोषण, जबरन गर्भपात का मामला दर्ज
हाथ में जो आया वही लेकर भागे लोग, धामनगांव में भीषण आग से आधा गांव राख, मची भारी चीख-पुकार
नागपुर के धामनगांव में लगी भीषण आग, सैकड़ों घर जलकर खाक, 3 लोगों की मौत, देखें खौफनाक मंजर का VIDEO
पुणे-बेंगलुरु हाईवे पर भीड़ ने रास्ता रोका, घंटों ठप रहि यातायात, प्रदर्शनकारियों को खदेड़ने के बाद खुला रास्ता
ये भी पढ़े:- पांच दिवसीय कार्यसप्ताह की मांग पर बैंक हड़ताल, अकोला में कामकाज ठप; आम नागरिक परेशान
कार्रवाई की मांग
नागरिकों का कहना है कि शासकीय योजनाओं का लाभ लेने के लिए वे दूर-दराज से कार्यालय आते हैं, लेकिन अधिकारी अक्सर अनुपस्थित रहते हैं। कभी C कहा जाता है कि साहब फील्ड पर हैं, तो कभी मीटिंग का बहाना दिया जाता है। नागरिकों ने सवाल उठाया है कि इन लेटलतीफ कर्मचारियों पर वरिष्ठ अधिकारी कार्रवाई क्यों नहीं करते। अब सबकी निगाहें जिलाधिकारी और संबंधित विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर टिकी हैं कि वे इस लापरवाही पर क्या कदम उठाते हैं।
