

Highlights:
अकोला प्रशासन पशुधन की संख्या और चारे की उपलब्धता के आधार पर तहसील व मंडल स्तर पर मासिक योजना बनाएगा।
कृषि और पशुपालन विभाग हरे व सूखे चारे की जरूरत तथा उपलब्धता का आकलन करेंगे।
प्रभावित ग्राम पंचायतों में कम से कम 5 हेक्टेयर सामूहिक भूमि और 10 हेक्टेयर निजी लाभार्थी भूमि पर चारा फसल लगाने का लक्ष्य रखा गया है।
Akola District Administration: अकोला जिले में वर्षा की कमी और रबी सीजन पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभाव को देखते हुए संभावित चारा संकट से निपटने के लिए जिला प्रशासन ने विशेष अभियान शुरू किया है। जिला कलेक्टर वर्षा मीणा ने कृषि, पशुपालन तथा रोजगार गारंटी विभाग को आवश्यक निर्देश जारी करते हुए चारा संतुलन (फॉडर बैलेंस) तैयार कर संभावित चारा संकट वाले गांवों की पहचान करने और वहां प्रभावी उपाय लागू करने के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी ने पशुपालन विभाग को जिले के पशुधन की संख्या के आधार पर प्रतिदिन आवश्यक हरे एवं सूखे चारे की जरूरत का आकलन करने के निर्देश दिए हैं। वहीं कृषि विभाग को खरीफ फसलों के क्षेत्रफल के आधार पर ज्वार का कड़वा, मक्का अवशेष, सोयाबीन कुटार तथा अरहर एवं चने के भूसे की उपलब्धता का सटीक आंकड़ा प्रस्तुत करने को कहा गया है। विभागों के समन्वय से आगामी नौ महीनों के लिए तहसील एवं मंडल स्तर पर मासिक चारा संतुलन तैयार किया जाएगा। इसके आधार पर चारा संकट प्रभावित गांवों की सूची अंतिम रूप से तैयार की जाएगी।
चारा संकट से निपटने के लिए प्रशासन ने 'विकसित भारत रोजगार एवं आजीविका गारंटी अभियान (ग्रामीण)' को भी इससे जोड़ा है। अंतर्गत इसके व्यक्तिगत एवं सामूहिक चरागाह भूमि पर बड़े पैमाने पर चारा फसलों की खेती की जाएगी।
संकटग्रस्त गांवों में अतिक्रमणमुक्त एवं विवाद रहित शासकीय चरागाह भूमि पर चारा उत्पादन किया जाएगा। प्रत्येक प्रभावित ग्राम पंचायत में कम से कम 5 हेक्टेयर सामूहिक भूमि तथा 10 हेक्टेयर निजी लाभार्थी भूमि पर चारा फसल लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
जिलाधिकारी वर्षा मीणा ने बताया कि इस पूरे अभियान की निगरानी के लिए तहसील स्तर पर तहसीलदार की अध्यक्षता में विशेष निगरानी समिति गठित की गई है, जो प्रत्येक सप्ताह समीक्षा करेगी। सभी संबंधित विभागों को नियमित प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी।
प्रत्येक सोमवार को उपजिलाधिकारी (रोजगार गारंटी योजना) के पास साप्ताहिक रिपोर्ट जमा करना अनिवार्य किया गया है। चारा संकट निवारण कार्यों में किसी भी प्रकार की देरी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लापरवाही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय कर उसके विरुद्ध कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।