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सिंहस्थ कुंभ 2026-27 के दौरान नासिक और त्र्यंबकेश्वर में बड़े पैमाने पर श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है।
ऑटो, टैक्सी और अन्य स्थानीय परिवहन सेवाओं के लिए मांग बढ़ने की संभावना है। रिपोर्ट में इस क्षेत्र से 10,000 करोड़ रुपये के कारोबार का अनुमान जताया गया है।
साधुग्राम, पंडाल, शौचालय, बिजली और अन्य व्यवस्थाओं के निर्माण में स्थानीय मजदूरों व कारीगरों को रोजगार मिलने की उम्मीद है।
Nashik Simhastha Kumbh: नासिक त्रंबकेश्वर सिंहस्थ 2026-27 को लेकर सरकार प्रशासन की तैयारियां जोरों पर हैं तो वही नासिक के निवासियों में इसको लेकर कोई उत्साह नहीं देखा जा रहा है कुंभ की चर्चा होते ही अधिकतर नासिक वासियों का मानना है कि कुंभ से नासिक को क्या फायदा होने वाला है या यहां के लोगों को क्या मिलेगा? यहां के लोगों का सवाल भी बहुत सही है क्योंकि अधिकतर लोगों के दिमाग में यह बात बैठ गई है कि यह केवल सरकार की फिजूल खर्ची है एक तरफ सुखा है दूसरी तरफ कई तरह की अन्य समस्याएं लेकिन सरकार कुंभ के लिए भारी भरकम बजट खर्च कर रही है।
इससे आम नासिक करो को क्या फायदा है या क्या फायदा होगा इस पर जब नवभारत ने अपनी विशेष पड़ताल की तो यह चौंकाने वाला तथ्य निकल कर सामने आया है। सरकार को फायदे की बात अगर यहां पर छोड़ भी दी जाए तो नासिक के मजदूर ऑटो टैक्सी मालिकों ड्राइवर फुटकर थोक सब्जी विक्रेता और किराना व्यवसाई के बीच ही लगभग दो ट्रिलियन 2000 करोड़ का इकोनामी ग्रोथ यहां के बाजार में होगा अगर इसे सरल शब्दों में कहा जाए तो कुंभ के समय नासिक के बाजारों में रूपयों की वर्षा होगी तो गलत नहीं है।
यहां पर केवल सरकार के द्वारा जारी किए गए अनुमान के तहत अगर मान लिया जाए कि लगभग 12 करोड़ श्रद्धालु आएंगे तो यह तय है कि इसमें से 50% से ज्यादा श्रद्धालु ट्रेन या बस के द्वारा नासिक त्रंबकेश्वर पहुंचेंगे और उसके बाद स्थानीय धर्म स्थलों जैसे नासिक से त्रंबकेश्वर यात्रा के स्वर के आसपास और नासिक के आसपास के धार्मिक पौराणिक जगह पर जाने के लिए वह लोकल ट्रांसपोर्ट ऑटो टैक्सी का ही सहारा लेंगे। अगर एक यात्री ट्रांसपोर्ट पर 2000 का खर्च अनुमान कम से कम मान लिया जाए तो 5 करोड लोगों पर यह खर्च 10000 करोड़ से ऊपर बैठता है। अब सोचिए इसका फायदा किसको होगा सीधा सा जवाब है कि नासिक करो को ही होगा जो टैक्सी ऑटो ड्राइवर या मालिक है।
प्रशासन के द्वारा अखाड़े के महंतों श्री महतो महामंडलेश्वरों आचार्य को केवल जमीन दी जाती है। जिसमें सामूहिक शौचालय बना रहता है और बिजली का कनेक्शन रहता है इसके बाद अपनी सुविधा अनुसार अटैक नान अटैक कमरे सत्संग हॉल कथा प्रवचन के लिए पंडाल अपनी सुविधा अनुसार सजावट शौचालय और अन्य व्यवस्थाओं के लिए सभी संतो के द्वारा स्थानी कारीगरों मजदूरों से ही कार्य लिया जाता है और नासिक के तपोवन में 1000 से ज्यादा खालसा त्रंबकेश्वर में लगभग 300 से ज्यादा पंडाल बनेंगे जिसको देखते हुए यह कहा जा सकता है कि इन सब की तैयारी को पूरी करने में मैं जून और जुलाई के माह में तीन माह तक लगभग 10000 मजदूर कार्य करेंगे तब यह कार्य संभव हो पाएगा।
एक मजदूर की एक माह की मजदूरी काम से कम 15 हजार भी रखी जाए तो 3 माह में उसे 45000 मिलेगा और 45000- 10000 किया जाए तो यह आंकड़ा चार अरब 50 करोड़ के आसपास पहुंच जाता है जब इन मजदूरों के पास पैसा आएगा तो वह पैसा कहां खर्च होगा कहीं है कि यह पैसा भी किसी न किसी रास्ते से मजदूरों की आवश्यकता के अनुसार नासिक के बाजार में ही लौट कर आएगा। यहां पर केवल मजदूरों का आंकड़ा दिया गया है उसके बाद इलेक्ट्रिशियन प्लंबर टेंट व्यवसाय साउंड सिस्टम सजावट को मिला दिया जाए तो यह भी लगभग 100 करोड़ से ऊपर ही चला जाता है।
सरकार के ही आंकड़ों को मान लिया जाए की लगभग 12 करोड लोग यहां पर आएंगे तो वह जब यहां आएंगे तो यही चाय पियेंगे नाश्ता करेंगे भोजन प्रसाद भी ग्रहण करेंगे और उनके लिए जगह-जगह साधु संतों के भंडारे भी चलते हैं कुछ स्वयंसेवी संस्थाएं भी भंडारा चलाती हैं लेकिन यह भी टाइम माना जाता है कि लगभग 25% लोग अपनी सुविधा अनुसार स्थानीय खाने पीने के होटल का सहारा लेते हैं।
अब आप अनुमान कीजिए कि इनके खाने पीने के व्यवसाय का कितना बड़ा ग्रंथ नासिक के बाजार का होगा जिसमें सबसे ज्यादा सब्जी व्यवसाय मसाला के व्यवसाय गेहूं आटा दाल तेल के व्यवसाय को देखा जाए तो यह आंकड़ा लगभग 1 ट्रिलियन तक पहुंच सकता है अब आप खुद ही सोच की नासिक को क्या मिलेगा?