अकोला में पानी पर बवाल: 47% जलसंचय के बावजूद अब 4 दिन में मिल रहा पानी
Akola Water Supply Issue: अकोला के पुराने शहर में पानी के लिए हाहाकार! 3 के बजाय 4 दिन में मिल रहा पानी। काटेपूर्णा में 47% जलसंचय, फिर भी किल्लत। भेदभावपूर्ण जलापूर्ति के खिलाफ नागरिकों में आक्रोश।
- Written By: प्रिया जैस
पानी की सप्लाई (सौजन्य-सोशल मीडिया)
Akola Municipal Corporation Water Department: अकोला शहर को पानी सप्लाई करने वाले काटेपूर्णा प्रकल्प में फिलहाल 47 प्रतिशत जलसंचय उपलब्ध है। इसके बावजूद पिछले कुछ दिनों से खासकर पुराने शहर के विभिन्न भागों में पानी सप्लाई की स्थिति बिगड़ गई है। पहले तीन दिन के अंतराल पर पानी दिया जाता था, लेकिन अब बिना किसी ठोस कारण और बिना सूचना दिए चार दिन में पानी सप्लाई हो रही है।
इस बदलाव से नागरिकों में नाराजगी और परेशानी बढ़ गई है। शहर को 25 एमएलडी और 65 एमएलडी जल शुद्धिकरण केंद्रों से पानी सप्लाई किया जाता है। जलकुंभों की संख्या पर्याप्त न होने के कारण अधिकांश क्षेत्रों में तीन दिन के अंतराल पर पानी मिलता है, जबकि कुछ हिस्सों में छह दिन में सप्लाई होती है। सीमा वृद्धि क्षेत्रों के नागरिकों को इसकी अधिक तकलीफ सहनी पड़ती है।
मनपा चुनाव तक यह व्यवस्था यथावत थी, लेकिन कार्यकारिणी अस्तित्व में आने के बाद अचानक पुराना शहर के कुछ हिस्सों में पानी सप्लाई का अंतराल बढ़ा दिया गया। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार कुछ जलकुंभों को 100 प्रतिशत भरने के लिए कुछ क्षेत्रों की सप्लाई एक दिन आगे बढ़ाई जा रही है।
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इस कारण आम नागरिकों को कठिनाई झेलनी पड़ रही है। नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को ऐसा असमान व्यवहार बंद करना चाहिए। यदि चार दिन में ही सप्लाई करनी है तो पूरे शहर में समान रूप से करनी चाहिए, ताकि किसी क्षेत्र पर अन्याय न हो।
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पुराना शहर पर अन्याय का जिम्मेदार कौन?
इस प्रकार का निर्णय अधिकारियों द्वारा अकेले लेना संभव नहीं माना जा रहा है। चर्चा है कि यह हस्तक्षेप किसी के निर्देश पर किया जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि पुराना शहर के कुछ हिस्सों की पानी सप्लाई एक दिन आगे बढ़ाने के पीछे असली हस्तक्षेप किसका है? नागरिकों में इस विषय पर तीव्र चर्चा शुरू हो गई है और प्रशासन से पारदर्शी नीति अपनाने की मांग की जा रही है।
