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वसंत में सजेगा आकाश: 17 फरवरी को वर्ष का पहला सूर्यग्रहण, आसमान में दिखेगा धूमकेतु और ग्रहों का अद्भुत नजारा

Akola News:17 फरवरी को वर्ष का पहला सूर्यग्रहण होगा, जो अंटार्क्टिका में कंकणाकृति दिखेगा। साथ ही आकाश में धूमकेतु और शनि, बुध, शुक्र जैसे ग्रहों का अद्भुत संगम दिखेगा विश्वभारती ने अवलोकन की अपील की

  • Written By: रूपम सिंह
Updated On: Feb 13, 2026 | 03:50 PM

17 फरवरी को वर्ष का पहला सूर्यग्रहण तस्वीर (सोर्स: सोशल मीडिया)

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Vishvabharati Science Centre Akola News: वसंत ऋतु के आगमन के साथ जहां प्रकृति रंग-बिरंगे फूलों, मधुर समीर और सुहावने वातावरण से सुसज्जित हो रही है, वहीं आकाश भी अपनी अद्भुत खगोलीय घटनाओं से लोगों को रोमांचित करने के लिए तैयार है। तारों, ग्रहों और धूमकेतुओं से सजा आकाश खगोल प्रेमियों के लिए इन दिनों विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। विश्वभारती विज्ञान केंद्र ने नागरिकों से अपील की है कि वे इन दुर्लभ खगोलीय घटनाओं का अवलोकन कर विज्ञान के प्रति अपनी जिज्ञासा और समझ को और अधिक समृद्ध करें।

17 फरवरी को वर्ष का पहला सूर्यग्रहण

केंद्र द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 17 फरवरी, माघी अमावस्या के दिन इस वर्ष का पहला सूर्यग्रहण घटित होगा। यह सूर्यग्रहण पृथ्वी के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र, विशेष रूप से अंटार्क्टिका के आसपास कंकणाकृति (रिंग ऑफ फायर) रूप में दिखाई देगा। कंकणाकृति सूर्यग्रहण उस स्थिति को कहा जाता है जब चंद्रमा सूर्य के मध्य भाग को ढक लेता है, किंतु उसका व्यास अपेक्षाकृत छोटा होने के कारण सूर्य का बाहरी किनारा अग्निवलय के समान चमकता हुआ दिखाई देता है।

प्रशांत महासागर और हिंद महासागर के समीपवर्ती क्षेत्रों में यह ग्रहण खंडग्रास रूप में दृष्टिगोचर होगा। हालांकि भारत तथा हमारे क्षेत्र में यह सूर्यग्रहण प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देगा, फिर भी खगोल विज्ञान की दृष्टि से यह एक महत्वपूर्ण घटना मानी जा रही है। वैज्ञानिकों के अनुसार ऐसे ग्रहण पृथ्वी, चंद्रमा और सूर्य की सटीक खगोलीय स्थिति का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करते हैं।

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आकाश में दिखेगा धूमकेतु

इसी बीच आकाश में एक और आकर्षक खगोलीय घटना देखने को मिल सकती है। C/2024 E1 नामक धूमकेतु इन दिनों सूर्य की परिक्रमा पूरी करते हुए हमारे आकाश में पहुंचा है। यह धूमकेतु अत्यंत दूर स्थित उर्ट क्लाउड से आया है, जो सौरमंडल की बाहरी सीमा पर स्थित बर्फीले पिंडों का विशाल क्षेत्र माना जाता है।

इस धूमकेतु की खोज पिछले वर्ष मार्च माह में पोलैंड के खगोलशास्त्री कैस्पर विअर्सचोस ने की थी। वैज्ञानिकों के अनुसार यह धूमकेतु अत्यंत लंबी अवधि में सूर्य की परिक्रमा करता है और लंबे अंतराल के बाद पृथ्वी के समीपवर्ती आकाश में दिखाई देता है।

हालांकि इसकी दूरी अधिक और आकार अपेक्षाकृत छोटा होने के कारण इसे नंगी आंखों से देख पाना संभव नहीं होगा। इसे देखने के लिए बड़ी एवं शक्तिशाली दुर्बीण की आवश्यकता होगी। विशेषज्ञों के अनुसार इसे संध्या समय दक्षिण-पश्चिम दिशा में लगभग 224 अंश पर देखा जा सकता है।

यह भी पढ़ें:- अकोला: विवाहिता के उत्पीड़न मामले में 6 आरोपियों पर मामला दर्ज; मायके से पैसे लाने के लिए दी जा रही थी दबाव

ग्रहों का अद्भुत संगम

धूमकेतु के आसपास आकाश में अन्य प्रमुख ग्रह भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। मीन राशि में स्थित शनि ग्रह स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। इसके अतिरिक्त बुध और शुक्र ग्रह भी संध्या के समय नंगी आंखों से दिखाई देंगे। पूर्वी आकाश में गुरु ग्रह अपनी तेजस्वी आभा के साथ चमकता हुआ दृष्टिगोचर होगा। खगोल प्रेमियों के लिए यह समय विशेष रूप से अनुकूल माना जा रहा है, क्योंकि एक ही अवधि में धूमकेतु और कई प्रमुख ग्रहों का अवलोकन संभव है।

विज्ञान के प्रति जागरूकता का अवसर

विश्वभारती विज्ञान केंद्र ने विद्यार्थियों, शिक्षकों और नागरिकों से अपील की है कि वे इन घटनाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझें और अंधविश्वासों से दूर रहें। सूर्यग्रहण एवं अन्य खगोलीय घटनाएं प्राकृतिक प्रक्रियाओं का परिणाम हैं और इनका मानव जीवन पर कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।

वसंत के इस सुहावने मौसम में जब प्रकृति नवजीवन का संदेश दे रही है, तब आकाश में घटित हो रही ये घटनाएं भी ब्रह्मांड की विशालता और रहस्यमयता का अनुभव कराती हैं। खगोल विज्ञान के प्रति रुचि रखने वालों के लिए यह समय सीखने, समझने और ब्रह्मांड की अद्भुत संरचना को निहारने का एक सुनहरा अवसर है।

चंद्रग्रहण कब होगा?

  • 17 फरवरी : वलयाकार सूर्यग्रहण
  • 3 मार्च : पूर्ण चंद्रग्रहण
  • 12 अगस्त : पूर्ण सूर्यग्रहण
  • 28 अगस्त : आंशिक चंद्रग्रहण
  • भारत से दिखाई देने वाला पूर्ण चंद्रग्रहण 3 मार्च को शाम 6:47 बजे प्रारंभ होगा।
  • इसका पता पोलिश खगोल शास्त्री कैस्पर विअर्सचोस ने पिछले वर्ष मार्च में लगाया था।
  • दूरी अधिक और आकार छोटा होने के कारण यह केवल बड़ी दुर्बीण से ही दिखाई देगा।
  • ग्रहों का दर्शन: धूमकेतु के समीप मीन राशि में स्थित शनि, साथ ही बुध और शुक्र ग्रह नंगी आंखों से देखे जा सकते हैं. इसी समय पूर्वी आकाश में गुरु ग्रह भी दिखाई देगा।

Akola astronomy solar eclipse comet 2026

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Published On: Feb 13, 2026 | 03:50 PM

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