अब आवारा कुत्तों के शरीर में लगेगी माइक्रोचिप, अहिल्यानगर के संगमनेर नगर परिषद में शुरू हुआ अनोखा मिशन

Stray Dog Microchipping: संगमनेर नगर परिषद ने आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए अनोखा अभियान शुरू किया है। इसमें नसबंदी, एंटी-रेबीज टीकाकरण के साथ माइक्रोचिप लगाकर कुत्तों की निगरानी की जाएगी।
Stray Dog Microchipping In Sangamner Nagar Parishad
संगमनेर नगर परिषद में कुत्तों के लिए बने शेल्टर होम (फोटो नवभारत)
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Stray Dog Microchipping In Sangamner Nagar Parishad: आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और रेबीज के खतरे से निपटने के लिए अहिल्यानगर जिले की संगमनेर नगर परिषद ने एक मिसाल कायम की है। नगर परिषद ने राज्य में पहली बार आवारा कुत्तों के वैज्ञानिक और मानवीय प्रबंधन के लिए एक बेहद आधुनिक अभियान की शुरुआत की है। इस योजना के तहत आवारा कुत्तों की नसबंदी और एंटी-रेबीज टीकाकरण करने के साथ-साथ उनके शरीर में एक विशेष माइक्रोचिप भी लगाई जा रही है। महाराष्ट्र में किसी भी नगर परिषद द्वारा शुरू किया गया यह अपनी तरह का पहला प्रोजेक्ट है।

माइक्रोचिप से रखी जाएगी हर कुत्ते पर नजर

इस योजना का मुख्य उद्देश्य शहर में कुत्तों की अनियंत्रित आबादी पर लगाम लगाना, रेबीज के खतरे को खत्म करना और आम नागरिकों को एक सुरक्षित माहौल देना है। कुत्तों के शरीर में लगाई जाने वाली माइक्रोचिप की मदद से उनकी पहचान करना, उनकी मेडिकल हिस्ट्री ट्रैकिंग और उनका पूरा डेटा संभालना काफी आसान हो जाएगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि किस क्षेत्र के कुत्ते का टीकाकरण और नसबंदी पूरी हो चुकी है।

जांच और इलाज की प्रक्रिया

संगमनेर नगर परिषद ने शहर के अलग-अलग हिस्सों से लाए गए हर कुत्ते की वेटेरिनरी ऑफिसर (पशु चिकित्सक) द्वारा शुरुआती जांच की जाती है। सर्जरी के लिए सही पाए गए कुत्तों की नसबंदी की जाती है और उन्हें एंटी-रेबीज वैक्सीन लगाई जाती है। हालांकि, जो कुत्ते गर्भवती हैं, जिन्होंने हाल ही में बच्चे को जन्म दिया है, या जो मेडिकल कारणों से सर्जरी के लिए फिट नहीं हैं, उन्हें बिना सर्जरी के उसी इलाके में वापस छोड़ दिया जाता है।

सर्जरी के बाद कुछ दिनों तक कुत्तों की खास देखभाल की जाती है। पूरी तरह ठीक होने के बाद, उनमें एक माइक्रोचिप लगाई जाती है। इसके बाद, कुत्ते को सुरक्षित रूप से उसी इलाके में वापस छोड़ दिया जाता है जहां से उसे लाया गया था। यह पहल आवारा कुत्तों के व्यवस्थित प्रबंधन में मदद करती है। इससे रेबीज का खतरा कम होता है, लोगों को होने वाली परेशानी कम होती है और जानवरों के प्रति दयालु रवैया बढ़ता है।

महाराष्ट्र विधान परिषद के सदस्य (MLC) सत्यजीत तांबे ने बताया कि संगमनेर नगर परिषद महाराष्ट्र की पहली ऐसी म्युनिसिपल काउंसिल बन गई है जिसने यह पहल शुरू की है, और दूसरे शहर भी इस कार्यक्रम पर ध्यान दे रहे हैं।

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