कुकड़ी नहर के लिए 47 करोड़ रुपये का फंड मंजूर, राम शिंदे के प्रयासों से होगा रेनोवेशन का काम
Kukadi Canal Renovation: महाराष्ट्र सरकार ने कुक के लिए 47.03 करोड़ रुपये की प्रशासनिक मंजूरी दी है, जिससे ड़ी नहर के रेनोवेशन सात सूखा प्रभावित तालुकों की व्यवस्था सुधरेगी।
- Written By: आंचल लोखंडे
Kukadi canal renovation (सोर्स: सोशल मीडिया)
Ahilyanagar Irrigation Project: महाराष्ट्र सरकार के जल संसाधन विभाग ने अहिल्यानगर, पुणे और सोलापुर जिलों में कुकड़ी डावा नहर के किलोमीटर 165 और 249 के बीच डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम के रेनोवेशन के लिए 47 करोड़ तीन लाख 52 हजार 400 रुपये की लागत से प्रशासनिक मंज़ूरी दे दी है।
विधान परिषद सभापति प्रो. राम शिंदे ने इस प्रशासनिक मंजूरी के लिए लगातार फॉलो-अप किया था। यह मुख्य नहर लगभग 30 वर्ष पहले कुकड़ी परियोजना के तहत बनाई गई थी। इसके कुछ हिस्सों में 12 से 15 वर्ष पहले लाइनिंग का काम किया गया था।
नहर की इस खराब स्थिति
पिछले 25 वर्षों से इस नहर से लगातार सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जा रहा है लेकिन नियमित लाइनिंग और रखरखाव के अभाव में नहर की स्थिति खराब हो गई थी। कई जगहों पर घास-फूस और झाड़ियां उग आई थीं तथा पुराने निर्माण क्षतिग्रस्त होने के कारण पानी के बहाव में रुकावटें आ रही थीं। इसके चलते लीकेज के कारण पानी की काफी बर्बादी हो रही थी और अंतिम छोर तक पानी पहुंचने में देरी हो रही थी। नहर की इस खराब स्थिति को सुधारने और पानी की बर्बादी रोकने के लिए सरकार की स्पेशल रिपेयर योजना के तहत यह कार्य किया जाएगा।
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इन तालुकों को मिलेगा लाभ
कुकड़ी परियोजना का लाभ कुल सात सूखा-प्रभावित तालुकों को मिलेगा। इनमें पुणे जिले के अंबेगांव, शिरूर और जुन्नर, अहिल्यानगर जिले के पारनेर, कर्जत और श्रीगोंदा, तथा सोलापुर जिले का करमाला तालुका शामिल है। यह कार्य महाराष्ट्र कृष्णा वैली डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन के माध्यम से किया जाएगा और स्वीकृत निधि का उपयोग केवल निर्धारित कार्यों के लिए ही किया जाएगा।
किए जाएंगे ये मरम्मत कार्य
स्पेशल रिपेयर कार्यों के तहत मुख्य नहर के क्रॉस-सेक्शन की मरम्मत, गहरी खुदाई वाले स्थानों पर क्षतिग्रस्त पत्थर की लाइनिंग को दुरुस्त करना, रिलीफ स्ट्रक्चर, पाइप पुलिया, सड़क पुल और झरनों जैसे पुराने व क्षतिग्रस्त ढांचों की मरम्मत शामिल है।
इन मरम्मत कार्यों से नहर में होने वाला लीकेज रुकेगा और पानी के परिवहन में आने वाला खर्च भी कम होगा। साथ ही सिंचाई दक्षता बढ़ाकर कॉन्सेप्चुअल बेनिफिट एरिया में लगभग 6000 हेक्टेयर क्षेत्र की सिंचाई व्यवस्था को सुधारने में मदद मिलेगी। राम शिंदे ने कहा कि सर्विस पाथ और ऑब्जर्वेशन पाथ की मरम्मत भी की जाएगी, जिससे नहर की निगरानी और रखरखाव करना आसान हो जाएगा।
