‘अगर शिंदे मुख्यमंत्री होते तो पूरे किसानों को मिलती कर्जमाफी’, शिवसेना नेता ने की फडणवीस सरकार की किरकिरी
Ravindra More Shiv Sena Devendra Fadnavis Loan Waiver: कर्जमाफी के नियमों पर शिंदे की शिवसेना का फडणवीस सरकार पर हमला; रविंद्र मोरे ने दी वर्षा बंगले के घेराव की चेतावनी।
- Written By: अनिल सिंह
कर्जमाफी के नियमों पर फडणवीस सरकार के खिलाफ उतरी शिंदे की शिवसेना (फोटो क्रेडिट-X)
Devendra Fadnavis vs Eknath Shinde as CM: महाराष्ट्र मंत्रिमंडल द्वारा हाल ही में किसानों के बकाया कृषि ऋणों को माफ करने के लिए नियम और दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सरकार का दावा है कि इस फैसले से उन किसानों को लाभ मिलेगा जो पिछली योजनाओं में छूट गए थे। लेकिन इन नए नियमों और शर्तों को लेकर अब महायुति गठबंधन के भीतर ही बगावत के सुर बुलंद होने लगे हैं। शिंदे की शिवसेना से जुड़े कार्यकर्ताओं का मानना है कि इन सख्त नियमों के कारण वास्तविक जरूरतमंद किसान इस योजना के लाभ से पूरी तरह वंचित रह जाएंगे।
इसी असंतोष के चलते कार्यकर्ताओं ने राहुरी बाजार समिति के मुख्य द्वार के सामने और अहिल्यानगर-मनमाड राजमार्ग पर जोरदार ‘रास्ता रोको’ प्रदर्शन किया। इस औचक आंदोलन के कारण सड़क के दोनों ओर वाहनों की कई किलोमीटर लंबी कतारें लग गईं और यातायात व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान शेतकरी सेना के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपनी ही सरकार की नीतियों को कटघरे में खड़ा किया। शिवसेना नेता (शेतकरी सेना के प्रदेश) अध्यक्ष रविंद्र मोरे का मानना है कि फडणवीस की जगह अगर शिंदे सीएम होते तो सभी को किसान कर्जमाफी का लाभ मिलता।
दमनकारी शर्तों के कारण कागजों पर सिमटी कर्जमाफी योजना
रास्ता रोको आंदोलन को संबोधित करते हुए शेतकरी सेना के प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र मोरे ने देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व वाले प्रशासनिक फैसलों पर तीखा प्रहार किया। उन्होंने खुले तौर पर आरोप लगाया कि सरकार द्वारा की गई कर्जमाफी की यह बड़ी घोषणा अब केवल कागजी दस्तावेजों और विज्ञापनों तक ही सीमित रह गई है। मोरे के अनुसार, ऋण माफी के लिए जो पेचीदा नियम, दमनकारी परिस्थितियां और सख्त कानून बनाए गए हैं, वे किसानों को राहत देने के बजाय उनकी परेशानी को और ज्यादा बढ़ाने वाले हैं। उन्होंने सरकार की इस मौजूदा नीति को सीधे तौर पर राज्य के गरीब किसानों के साथ एक सरासर धोखा करार दिया है।
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अगर एकनाथ शिंदे मुख्यमंत्री होते तो किसानों को नहीं झेलनी पड़ती परेशानी
शिवसेना नेता ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री पद के नेतृत्व को लेकर एक बड़ा राजनीतिक बयान दे डाला, जिसने महायुति के भीतर के शक्ति संतुलन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उन्होंने फडणवीस प्रशासन को निशाने पर लेते हुए कहा कि इन सख्त और दमनकारी कानूनों के कारण किसानों को दफ्तरों के चक्कर काटने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। मोरे ने दावा किया कि अगर आज एकनाथ शिंदे राज्य के मुख्य कार्यकारी यानी मुख्यमंत्री पद पर आसीन होते, तो किसानों को इन कठिन परिस्थितियों का सामना बिल्कुल नहीं करना पड़ता। वे बिना किसी देरी के तुरंत किसानों के हित में पूर्ण कर्जमाफी की घोषणा कर देते और ऐसे दमनकारी नियम कभी लागू नहीं होने देते।
‘वर्षा’ बंगले के बाहर प्रदर्शन की चेतावनी और 15 जून की समय सीमा
इस आक्रामक आंदोलन के माध्यम से शिवसेना के इस धड़े ने अपनी ही सरकार को सीधे तौर पर चेतावनी देते हुए एक कड़ा अल्टीमेटम जारी कर दिया है। संगठन ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखते हुए एक निश्चित समय सीमा तय की है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि सरकार द्वारा कर्जमाफी योजना पर लगाई गई सभी दमनकारी और कठिन शर्तों को आगामी 15 जून 2026 तक हर हाल में हटाया जाए। कार्यकर्ताओं ने दो टूक लहजे में कहा है कि अगर तय तारीख तक इन नियमों में ढील देकर सभी किसानों को शामिल नहीं किया गया, तो वे मुंबई में मुख्यमंत्री के आधिकारिक निवास ‘वर्षा’ बंगले के बाहर बैठकर अपनी ही सरकार के खिलाफ तीव्र विरोध प्रदर्शन करेंगे।
