अहिल्यानगर पर बढ़ा कर्ज का संकट, 825 करोड़ जुटाने की चुनौती, मनपा लेगी भारी लोन
Ahilyanagar Municipal Loan Crisis: अहिल्यानगर महानगरपालिका पानी और सीवरेज परियोजनाओं के लिए 825 करोड़ रुपये का कर्ज जुटाने की तैयारी में है। खराब आर्थिक स्थिति के बीच कर्ज अदायगी पर सवाल खड़े हैं।
- Written By: आंचल लोखंडे
Ahilyanagar Municipal corporation (सोर्सः फाइल फोटो- सोशल मीडिया)
Ahilyanagar Property Tax Collection Issue: अहिल्यानगर महानगरपालिका कर्ज के लिए मानो कटोरा लेकर खड़ी है, लेकिन कोई भी वित्तीय संस्था कर्ज देने से पहले उधार लेने वाले की आर्थिक स्थिति का आकलन करती है। हर महीने कर्मचारियों का वेतन देने के लिए संघर्ष कर रही मनपा को आखिर कर्ज मिलेगा या नहीं? और यदि मिल भी गया, तो उसकी अदायगी कैसे होगी? ये सवाल फिलहाल सबसे बड़े बन गए हैं। कागजों पर भले ही जवाब सकारात्मक दिखाई देते हों, लेकिन हकीकत में उन्हें लागू करना आसान नहीं है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि आखिर मनपा के कटोरे में कौन सी संस्था कर्ज डालने को तैयार होती है।
आर्थिक रूप से कमजोर हो चुकी महानगरपालिका को दोबारा पटरी पर लाने के लिए बड़े फंड या भारी कर्ज की जरूरत है। सरकारी अनुदान मिलना लगभग असंभव माना जा रहा है, इसलिए अब पूरा ध्यान कर्ज पर है। राज्य सरकार ने सुझाव दिया है कि पानी और भूमिगत सीवरेज परियोजनाओं के लिए मनपा अपना हिस्सा कर्ज के जरिए जुटाए।
पानी और सीवरेज परियोजनाओं के लिए भारी कर्ज की तैयारी
महानगरपालिका को पानी योजना के लिए 375 करोड़ रुपये और भूमिगत सीवरेज योजना के लिए 450 करोड़ रुपये जुटाने हैं। इतनी बड़ी रकम देखकर ही वित्तीय दबाव का अंदाजा लगाया जा सकता है। मनपा का दावा है कि वित्त आयोग की ग्रांट और टैक्स कलेक्शन के जरिए इस कर्ज की अदायगी की जाएगी।
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हालांकि, वित्त आयोग की ग्रांट पर कई शर्तें लागू होती हैं और टैक्स कलेक्शन की स्थिति भी बेहद कमजोर है। मनपा हर साल टैक्स वसूली का लक्ष्य पूरा नहीं कर पा रही है। पेनल्टी में छूट देने के बावजूद टैक्स कलेक्शन 40 से 45 करोड़ रुपये से ज्यादा नहीं पहुंचता। हालत यह है कि पानी योजना का बिजली बिल भी समय पर जमा नहीं हो पाता और हर दो-तीन महीने में महावितरण बिजली कटौती की चेतावनी देता है। ऐसे में करोड़ों रुपये के कर्ज की किस्तें कैसे चुकाई जाएंगी, यह बड़ा सवाल बना हुआ है।
कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के जरिए कर्ज चुकाने की योजना
शहर के नेहरू मार्केट, प्रोफेसर कॉलोनी गंजबाजार और NCC चौक कार्यालय की जगह पर कमर्शियल कॉम्प्लेक्स बनाने की योजना तैयार की गई है। इसके लिए 86.19 करोड़ रुपये का कर्ज जुटाने की तैयारी है। मनपा का दावा है कि इन कॉम्प्लेक्स में प्लॉट की ई-नीलामी, 30 साल की लीज, नॉन-रिफंडेबल डिपॉजिट और मासिक किराए के जरिए कर्ज चुकाया जाएगा। हालांकि, सवाल यह भी है कि जो मनपा मौजूदा संपत्तियों का किराया नियमित रूप से वसूल नहीं कर पा रही, वह नए प्रोजेक्ट में कितनी सख्ती बरत पाएगी।
रिकवरी पर बढ़ेगा अतिरिक्त बोझ
महानगरपालिका हर साल औसतन 40 करोड़ रुपये की वसूली करती है। इसी रकम से पानी योजना, स्ट्रीट लाइट, बिजली बिल, कर्मचारियों का वेतन, पेंशन और विकास कार्यों का खर्च चलाया जाता है। इसके बावजूद कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं मिलता, बुजुर्गों को पेंशन के लिए चक्कर लगाने पड़ते हैं और विकास कार्यों के ठेकेदारों के बिल भी लंबित रहते हैं। ऐसे में यदि नए कर्ज की किस्तें भी जोड़ दी जाएं, तो विकास कार्यों के लिए धन बचना मुश्किल हो जाएगा।
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क्या बैंक देंगे कर्ज?
महानगरपालिका की मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि क्या कोई बैंक इतना बड़ा कर्ज देने को तैयार होगा? हालांकि, आयुक्त और बैंक अधिकारियों के बीच हुई बैठकों के बाद कर्ज मिलने की संभावना जताई जा रही है। फिर भी, यदि कर्ज मंजूर होता है तो ठेकेदारों, महावितरण, सिंचाई विभाग और बैंक अधिकारियों को भी भुगतान के लिए महानगरपालिका के चक्कर लगाने पड़ सकते हैं।
