उज्जैन: भस्म आरती में दिव्य स्वरूप में विराजे बाबा महाकाल, अलौकिक श्रृंगार के दर्शन कर भावविभोर हुए श्रद्धालु

Mahakal Bhasma Aarti: उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में आज भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का दिव्य श्रृंगार किया गया। हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर भाव विभोर हो उठे।
Ujjain Mahakal Temple
बाबा महाकाल (फोटो सोर्स- नवभारत)
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Ujjain Mahakal Temple: उज्जैन के विश्व प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग भगवान श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार को ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की द्वितीया तिथि पर प्रातःकालीन भस्म आरती के दौरान बाबा महाकाल का भव्य और दिव्य श्रृंगार किया गया। अलौकिक स्वरूप में विराजमान भगवान महाकाल के दर्शन के लिए तड़के सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ मंदिर परिसर में उमड़ पड़ी। देश-विदेश से आए हजारों भक्तों ने बाबा महाकाल के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

परंपरा के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में मंदिर के कपाट खोले गए। इसके बाद भगवान महाकाल का जल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से बने पंचामृत से विधि-विधान पूर्वक अभिषेक किया गया। अभिषेक के पश्चात भगवान का विशेष पूजन-अर्चन संपन्न हुआ। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से पवित्र भस्म अर्पित कर विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती की गई, जो महाकाल मंदिर की सबसे विशिष्ट और प्राचीन परंपराओं में से एक मानी जाती है।

बाबा महाकाल का किया गया आकर्षक श्रृंगार

भस्म आरती के उपरांत बाबा महाकाल का आकर्षक श्रृंगार किया गया। भगवान के मस्तक पर भांग, चंदन और शुष्क मेवों से मनोहारी आकृतियां बनाई गईं। साथ ही स्वर्ण एवं रजत आभूषणों से अलंकृत कर उन्हें दिव्य स्वरूप प्रदान किया गया। श्रृंगार के बाद बाबा महाकाल का रूप अत्यंत मनमोहक और अद्भुत दिखाई दे रहा था। श्रद्धालु इस अलौकिक स्वरूप के दर्शन कर मंत्रमुग्ध हो गए।

हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजा मंदिर परिसर

मंदिर परिसर में भक्ति और आस्था का अद्भुत वातावरण देखने को मिला। भस्म आरती के दौरान पूरा परिसर 'हर-हर महादेव' और 'जय श्री महाकाल' के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से आरती में सहभागिता की और भगवान महाकाल से सुख, समृद्धि एवं कल्याण की कामना की।

हर दिन आते हैं लाखों लोग

महाकाल मंदिर की भस्म आरती और बाबा के दिव्य श्रृंगार के दर्शन प्रतिदिन लाखों श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बने हुए हैं। उज्जैन में होने वाली यह अद्वितीय धार्मिक परंपरा देश ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

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