सीधी: हाथियों के हमले में वृद्ध दंपति की दर्दनाक मौत, विस्थापन नीति पर उठे सवाल, ग्रामीणों में भारी आक्रोश
Couple Death In Elephant Attack: सीधी जिले के चिनगी गांव में जंगली हाथियों के हमले में वृद्ध दंपति की मौत हो गई। घटना के बाद ग्रामीणों ने विस्थापन नीति और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
- Reported By: अर्पित पाण्डेय | Edited By: प्रीतेश जैन
हाथियों के हमले में क्षतिग्रस्त घर (फोटो सोर्स- नवभारत)
Sidhi Wild Elephant Attack: सीधी जिले के वनांचल क्षेत्र में मानव-वन्यजीव संघर्ष की एक और दर्दनाक घटना सामने आई है। कुसमी क्षेत्र की ग्राम पंचायत गाजर के चिनगी गांव में रविवार देर रात जंगली हाथियों के हमले में वृद्ध दंपति की मौत हो गई। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है, वहीं प्रभावित परिवार को अब तक विस्थापन का लाभ नहीं मिलने को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और वन विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
जानकारी के अनुसार ग्राम तिलिया निवासी 60 वर्षीय भैयालाल यादव और उनकी पत्नी रविवार रात अपने घर में सो रहे थे। देर रात करीब दो बजे हाथियों का झुंड गांव में पहुंच गया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हाथियों ने घर को घेर लिया और दोनों बुजुर्ग पति-पत्नी को कुचल दिया। हमले में दोनों की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। घटना की जानकारी मिलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए।
लापरवाही के चलते आक्रोश में ग्रामीण
सूचना मिलने पर पुलिस, राजस्व विभाग और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची, लेकिन ग्रामीणों का गुस्सा इतना अधिक था कि उन्होंने शवों को उठाने से इंकार कर दिया। ग्रामीणों का कहना था कि प्रशासन और वन विभाग को क्षेत्र में लगातार मंडरा रहे हाथियों के खतरे की जानकारी होने के बावजूद पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए।
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कई परिवारों को नहीं मिला पुनर्वास योजना का लाभ
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि गांव संजय टाइगर रिजर्व क्षेत्र से लगा हुआ है, जहां हाथियों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। इसके बावजूद गांव के सभी परिवारों का विस्थापन नहीं किया गया। ग्रामीणों के अनुसार कुछ परिवारों को तो पुनर्वास योजना का लाभ मिला, लेकिन मृतक परिवार सहित करीब 40 लोग अब भी विस्थापन की प्रक्रिया से बाहर हैं।
कई बार मांग की, लेकिन ठोस कार्रवाई नहीं
हाथियों के हमले को लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासनिक अधिकारियों और एसडीएम कार्यालय में आवेदन देकर सुरक्षित स्थान पर बसाने की मांग की थी, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कई परिवारों को उचित मुआवजा नहीं मिलने के कारण भी विस्थापन संभव नहीं हो पाया। ग्रामीणों का आरोप है कि आंशिक और टुकड़ों में किए गए विस्थापन के कारण क्षेत्र में मानव और वन्यजीवों के बीच संघर्ष लगातार बढ़ रहा है।
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उचित मुआवजे और विस्थापन की मांग
घटना के बाद ग्रामीणों ने मृतक परिवार को उचित मुआवजा, शेष परिवारों के समुचित पुनर्वास और पूरे गांव के व्यवस्थित विस्थापन की मांग की है। फिलहाल प्रशासनिक अमला मौके पर मौजूद है और मामले की जांच कर रहा है। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा और विस्थापन नीति की प्रभावशीलता पर गंभीर बहस छेड़ दी है।
