

Shivpuri MLA Apology: शिवपुरी में राज्य स्तरीय बलराम कृषि महोत्सव 2026 के दौरान प्रोटोकॉल और मंच व्यवस्था को लेकर विवाद खड़ा हो गया। आरोप है कि अफसरशाही और प्रोटोकॉल के नाम पर चुनी हुई महिला जनप्रतिनिधियों को मंच पर पीछे की पंक्ति में स्थान दिया गया, जिससे वे नाराज हो गईं।
22 अगस्त को कृषि उपज मंडी पिपरसमां में आयोजित कार्यक्रम में जनपद पंचायत अध्यक्ष हेमलता रघुवीर रावत और नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा मंच पर पहुंचीं, लेकिन उन्हें पीछे की पंक्ति में सीट दी गई। नाराज होकर दोनों मंच से नीचे उतर आईं।
मंच से उतरने के बाद कुछ अधिकारियों ने दोनों जनप्रतिनिधियों को वापस मंच पर आने के लिए मनाने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया। दोनों ने कहा कि मंच पर सिर्फ दो महिला जनप्रतिनिधि थीं और उनकी सीट भी सबसे पीछे लगाई गई। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या महिला जनप्रतिनिधियों की यही हैसियत है? उन्होंने कहा कि वे जनता द्वारा चुनी गई हैं और यदि मंच पर सम्मान नहीं मिल रहा तो उनका उचित स्थान जनता के बीच है। इसके बाद दोनों मंच के नीचे बैठ गईं। घटनाक्रम से कार्यक्रम में मौजूद लोगों के बीच भी चर्चा शुरू हो गई।
मामला बिगड़ता देख शिवपुरी जिले के विधायक देवेंद्र जैन को खुद मंच से नीचे आना पड़ा। उन्होंने दोनों महिला जनप्रतिनिधियों से हाथ जोड़कर माफी मांगी और उन्हें मनाने का प्रयास किया। बताया गया कि विधायक ने हेमलता रघुवीर रावत का हाथ पकड़कर उन्हें बड़ी मुश्किल से वापस मंच पर पहुंचाया। इसके बाद गायत्री शर्मा को भी मनाया गया। आनन-फानन में दोनों को मंच की अगली पंक्ति में सीट दी गई। इस दौरान पहले से अगली पंक्ति में बैठे कुछ पदाधिकारी पीछे और नीचे खिसकते नजर आए। पूरे घटनाक्रम के बाद कार्यक्रम में महिला सम्मान और जनप्रतिनिधियों के प्रोटोकॉल को लेकर सवाल उठने लगे।
इस पूरे विवाद में जिला पंचायत सदस्य भारती रावत को लेकर भी नाराजगी सामने आई। बताया गया कि जिस जिला पंचायत वार्ड में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया गया, उसी वार्ड की सदस्य को मंच पर जगह नहीं दी गई। इसके बाद भारती रावत कार्यक्रम छोड़कर चली गईं। उनके ससुर भूपेंद्र रावत ने इसे सीधा अपमान बताते हुए कहा कि जब कार्यक्रम उसी वार्ड में हो रहा है और वहां की निर्वाचित सदस्य को ही मंच पर स्थान नहीं दिया गया, तो उनके रुकने का कोई औचित्य नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि दूसरे वार्डों के सदस्यों को मंच पर जगह दी गई, जबकि स्थानीय जिला पंचायत सदस्य को नजरअंदाज किया गया। अब यह मामला प्रशासनिक प्रोटोकॉल के साथ-साथ महिला और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर भी चर्चा में है।