स्वास्थ्य व्यवस्थाओं की खुली पोल: अस्पताल से डॉक्टर और कर्मचारी गायब, फर्श पर लेटने को मजबूर गर्भवती महिला
Sehore Hospital Viral Video: सीहोर के भैरुंदा सरकारी अस्पताल में मरीजों का इलाज भगवान भरोसे हो रहा है। रात में अस्पताल में डॉक्टर और कर्मचारी नदारद दिखे। प्रेग्नेंट महिला जमीन पर लेटने को मजबूर दिखी।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: प्रीतेश जैन
अस्पताल में जमीन पर लेटी गर्भवती महिला (फोटो सोर्स- नवभारत)
Pregnant Woman On Hospital Floor: सीहोर के भैरुंदा नगर से स्वास्थ्य व्यवस्थाओं को लेकर सरकारी दावों की पोल खोलने वाला मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक वीडियो ने सरकारी अस्पतालों की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। वायरल वीडियो में एक गर्भवती महिला रात के समय सरकारी अस्पताल के फर्श पर लेटी हुई दिखाई दे रही है। दावा किया जा रहा है कि उस दौरान अस्पताल में न तो कोई डॉक्टर मौजूद था और न ही कोई स्वास्थ्य कर्मी महिला की मदद के लिए उपलब्ध था।
जानकारी के मुताबिक यह मामला भैरुंदा के सरकारी अस्पताल का बताया जा रहा है, जहां प्रसव पीड़ा से परेशान गर्भवती महिला को समय पर इलाज और बिस्तर तक नहीं मिल सका। मजबूरी में महिला को अस्पताल के फर्श पर ही लेटना पड़ा। मौके पर मौजूद लोगों ने इस पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।
लोगों में भारी नाराजगी
वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया यूजर्स में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि सरकार स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर बनाने के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर मरीजों को मूलभूत सुविधाएं तक नहीं मिल पा रही हैं। खासकर गर्भवती महिलाओं के साथ इस तरह की लापरवाही को लेकर लोगों ने अस्पताल प्रशासन को जमकर घेरा है।
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जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग
सोशल मीडिया पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो गई है। कई लोगों ने इसे स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी विफलता बताते हुए दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। वहीं, घटना के बाद अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब तक कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है।
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आम लोग भुगत रहे खामियाजा
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों में व्यवस्थाओं की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार नहीं किया गया, तो इसका खामियाजा आम लोगों को अपनी जान गंवाकर चुकाना पड़ सकता है।
