ब्राह्मण बेटियों पर बयान देने वाले IAS को गधे की सवारी! बिगड़े बोल तो बीच बाजार हुई जूतों की बरसात

ब्राह्मण की बेटियों पर विवादित बयान देने वाले IAS संतोष वर्मा के खिलाफ भोपाल में जोरदार प्रदर्शन हुए। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में पहुंचे GEN-Z ने वर्मा के पुतले को गधे पर बैठाकर घुमाया गया।
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ब्राह्मण बेटियों पर बयान देकर बुरे फंसे IAS संतोष वर्मा (फोटो- सोशल मीडिया)
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IAS Santosh Verma Controversy Brahmin Protest: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में ब्राह्मण बेटियों पर अपमानजनक स्टेटमेंट देने वाले अधिकारी के खिलाफ एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिसने प्रशासनिक और सामाजिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है। सीनियर IAS अधिकारी और अजाक्स के प्रांताध्यक्ष संतोष वर्मा द्वारा ब्राह्मण बेटियों को लेकर दिए गए विवादित बयान की आग अब सड़कों पर उतर आई है। शनिवार को बरकतउल्ला विश्वविद्यालय के सामने जेन-जी यानी नई पीढ़ी के युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा। प्रदर्शनकारियों ने अधिकारी के पुतले को गधे पर बैठाकर घुमाया और उस पर जूते-चप्पलों की बरसात कर दी, जो सीधे तौर पर समाज के तीखे आक्रोश को बयां करता है।

इस जोरदार प्रदर्शन का नेतृत्व पंडित आशीष शर्मा कर रहे थे, जिनका स्पष्ट कहना है कि यह लड़ाई केवल एक समाज की नहीं, बल्कि प्रदेश की हर बेटी के सम्मान की है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने दोषी अधिकारी पर तत्काल एफआईआर दर्ज कर उन्हें निलंबित नहीं किया, तो युवा खुद संतोष वर्मा को घर से निकालकर इसी तरह गधे पर बैठाकर पूरे मध्य प्रदेश में जुलूस निकालेंगे। वहीं, कांग्रेस प्रवक्ता विवेक त्रिपाठी ने भी मौके पर पहुंचकर भाजपा के ब्राह्मण नेताओं की चुप्पी पर सवाल उठाए और पूछा कि क्या उनका जमीर मर चुका है जो बहन-बेटियों के सम्मान पर चोट लगने के बावजूद वे खामोश बैठे हैं।

आक्रोश की नई परिभाषा

प्रदर्शनकारी अभिषेक द्विवेदी ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि संतोष वर्मा की मानसिकता गधे से भी बदतर है, इसलिए उन्हें भविष्य के लिए सबक सिखाना जरूरी है ताकि कोई भी अधिकारी ऐसी गंदी सोच रखने से पहले सौ बार सोचे। लकी चौबे ने साफ कर दिया है कि जब तक दोषी पर कार्रवाई नहीं होती, यह आंदोलन जारी रहेगा। खास बात यह है कि इस प्रदर्शन को जेन-जी प्रोटेस्ट कहा जा रहा है। इसमें 13 से 28 साल के वो युवा शामिल हैं जो डिजिटल युग में पले-बढ़े हैं और सामाजिक मुद्दों पर बेबाक राय रखते हैं। नेपाल विद्रोह की तर्ज पर ये युवा अपनी सामूहिक नाराजगी जाहिर कर रहे हैं, जिसमें अक्षय तोमर, रवि परमार और साहिल प्रताप सिंह जैसे सैकड़ों युवा शामिल रहे।

दिल्ली तक पहुंची शिकायत

मामले की गंभीरता को देखते हुए रीवा सांसद जनार्दन मिश्रा ने अब केंद्र सरकार के कार्मिक राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह को पत्र लिखा है। सांसद ने पत्र में उस बयान का जिक्र किया है जिसमें वर्मा ने कथित तौर पर कहा था कि जब तक ब्राह्मण अपनी बेटी उनके बेटे को नहीं देते या संबंध नहीं बनाते, आरक्षण जारी रहना चाहिए। सांसद ने इसे लैंगिक रूप से संवेदनशील और जातीय वैमनस्य फैलाने वाला बताया है। इसके अलावा, सांसद ने संतोष वर्मा पर यह भी गंभीर आरोप लगाया है कि वे पहले अनुसूचित जाति वर्ग के थे, लेकिन आईएएस चयन और पदोन्नति के लिए उन्होंने खुद को अनुसूचित जनजाति वर्ग का बताया। सांसद ने इस पूरे फर्जीवाड़े और आपराधिक मामलों की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।

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