राजा राममोहन राय ‘अंग्रेजों के दलाल’! MP के मंत्री के बिगड़े बोल, मचा बवाल तो कही ये बात
Madhya Pradesh की मोहन सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने महान स्वतंत्रता सेनानी और समाज-सुधारक राजा राममोहन राय मंत्री को अंग्रेजों का 'दलाल' बता दिया। उनके बयान पर बवाल मचा गया है।
- Written By: सौरभ शर्मा
राजा राममोहना राय अंग्रेजों के दलाला, MP के मंत्री के बिगड़े बोल (फोटो- सोशल मीडिया)
MP Education Minister Remark on Raja Rammohan Roy: मध्य प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार अपने एक बयान को लेकर बुरी तरह घिर गए हैं। उन्होंने महान समाज सुधारक राजा राममोहन राय को अंग्रेजों का ‘दलाल’ बता दिया। यह बयान उन्होंने आदिवासी नेता बिरसा मुंडा की जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में दिया। जैसे ही यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर आई, भारी बवाल मच गया। चौतरफा आलोचना के बाद, मंत्री जी को 24 घंटे के भीतर ही अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने माफी मांग ली।
विवाद को बढ़ता देख, परमार ने रविवार को एक वीडियो संदेश जारी किया। उन्होंने कहा कि यह टिप्पणी “गलती से उनके मुंह से निकल गई” जिसके लिए उन्हें “बहुत दुख है” और वह प्रायश्चित करते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राजा राममोहन राय एक समाज सुधारक थे और उनका सम्मान किया जाना चाहिए। मंत्री ने कहा कि उनका इरादा किसी भी ऐतिहासिक व्यक्तित्व का अपमान करना नहीं था। यह माफीनामा उनके मूल बयान के ठीक उलट था जिसने विवाद की आग भड़काई थी।
सती प्रथा खत्म कराने वाले महान स्वतंत्रता सेनानी और समाज-सुधारक राजा राममोहन राय मंत्री जी के हिसाब से ‘अंग्रेजों का दलाल’ थे। pic.twitter.com/l9DFIGm7MO — Sourabh Sharma (@SourabhPaliya) November 16, 2025
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आखिर क्या कहा था मंत्री ने?
आगर मालवा में शनिवार को बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर बोलते हुए इंदर सिंह परमार ने कहा था, “राजा राममोहन राय एक ब्रिटिश एजेंट थे। उन्होंने देश में उनके दलाल के रूप में काम किया।” मंत्री जी यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे कहा कि राय ने “धर्मांतरण का एक दुष्चक्र शुरू किया था।” परमार ने दावा किया कि अंग्रेजों ने कई लोगों को “फर्जी समाज सुधारक” के रूप में पेश किया और धर्मांतरण को बढ़ावा देने वालों को आगे रखा। उन्होंने कहा कि ब्रिटिश काल में मिशनरी स्कूल ही एकमात्र शैक्षणिक संस्थान थे और वे शिक्षा का इस्तेमाल धर्मांतरण के लिए एक आवरण के रूप में करते थे।
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बिरसा मुंडा से की तुलना
अपने भाषण में, परमार ने कहा कि अगर किसी में इसे (धर्मांतरण) रोकने और आदिवासी समाज की रक्षा करने का साहस था, तो वह बिरसा मुंडा थे। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने इस चलन को पहचाना और अपने समुदाय के लिए और ब्रिटिश शासन के खिलाफ लड़ने के लिए मिशनरी शिक्षा छोड़ दी। मंत्री का यह बयान इसलिए भी हैरान करने वाला है क्योंकि राजा राममोहन राय को आधुनिक भारत के पुनर्जागरण का जनक माना जाता है। 22 मई, 1772 को बंगाल के राधानगर में जन्मे राय ने भारत में ज्ञानोदय और उदार सुधारवादी आधुनिकीकरण के युग की शुरुआत की थी।
