MP News: राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य देवरी इको सेंटर में हुई हैचिंग, 200 अंडों में से 70 घड़ियाल बच्चे बाहर निकले
Morena News: चंबल में इन दिनों घड़ियाल संरक्षण को लेकर उत्साह का माहौल है। नदी के विभिन्न घाटों से सुरक्षित लाए गए घड़ियालों के लगभग 200 अंडों में से अब तक 70 नन्हे घड़ियाल बच्चे बाहर आ चुके हैं।
- Written By: सजल रघुवंशी
देवरी इको सेंटर (सोर्स- सोशल मीडिया)
National Chambal Sanctuary Gharial Conservation: राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य के अंतर्गत आने वाले देवरी इको सेंटर में इन दिनों घड़ियाल संरक्षण को लेकर उत्साह का माहौल है। चंबल नदी के विभिन्न घाटों से सुरक्षित लाए गए घड़ियालों के लगभग 200 अंडों में से अब तक 70 नन्हे घड़ियाल बच्चे बाहर आ चुके हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों की निगरानी में अंडों से बच्चों के निकलने की प्रक्रिया लगातार जारी है।
विशेषज्ञों के अनुसार, घड़ियालों के जीवन चक्र में घोंसले के भीतर का तापमान सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही तापमान यह तय करता है कि अंडों से निकलने वाले शावक नर होंगे या मादा। जब मादा घड़ियाल अंडे देती है, तब शुरुआती अवस्था में अंडों के भीतर पल रहे भ्रूण का कोई निश्चित लिंग नहीं होता। बाद में घोंसले के तापमान के आधार पर उनका लिंग निर्धारित होता है।
वन्यजीव वैज्ञानिकों ने क्या कहा?
वन्यजीव वैज्ञानिकों का कहना है कि जन्म के समय सभी नन्हे घड़ियाल बच्चे एक जैसे दिखाई देते हैं। केवल बाहरी बनावट देखकर यह पहचानना संभव नहीं होता कि कौन नर है और कौन मादा। समय के साथ जब उनका आकार और उम्र बढ़ती है, तब उनके लिंग की पहचान स्पष्ट हो पाती है।
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सटीक तापमान का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिक
मध्य प्रदेश में वन्यजीव वैज्ञानिक लंबे समय से उस सटीक तापमान का अध्ययन कर रहे हैं, जिस पर अंडों के भीतर नर या मादा का विकास होता है। हालांकि अभी तक वह निश्चित तापमान पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाया है, लेकिन शोध में यह तथ्य सामने आया है कि घोंसले की ऊपरी परत में मौजूद अंडों को अधिक गर्मी मिलती है और उनसे सामान्यतः नर घड़ियाल जन्म लेते हैं। वहीं, निचली परत में मौजूद अपेक्षाकृत ठंडे अंडों से अधिकतर मादा घड़ियाल विकसित होती हैं।
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घड़ियाल संरक्षण के लिए तापमान संतुलन बेहद जरूरी
विशेषज्ञों के अनुसार घड़ियालों के संरक्षण के लिए अनुकूल तापमान और प्राकृतिक आवास का संतुलन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। चंबल क्षेत्र में चल रहे संरक्षण प्रयासों का सकारात्मक असर देखने को मिल रहा है, जिससे घड़ियालों की संख्या में धीरे-धीरे वृद्धि हो रही है। वन विभाग और संरक्षण टीमों की निगरानी से इनके प्राकृतिक वातावरण को सुरक्षित रखने में मदद मिल रही है। इसे वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और उत्साहजनक कदम माना जा रहा है।
