मुरैना में रामकथा और ताजिया मार्ग को लेकर विवाद, देर रात दोनों समुदायों का प्रदर्शन, प्रशासन ने निकाला समाधान
Tazia Route Dispute : सबलगढ़ में रामकथा और ताजिया जुलूस के मार्ग को लेकर विवाद हो गया। दोनों पक्षों और प्रशासन के बीच सहमति के बाद ताजिया जुलूस वैकल्पिक मार्ग से निकालने का फैसला लिया गया।
- Reported By: योगेश पाराशर | Edited By: प्रीतेश जैन
प्रदर्शनकारी (फोटो सोर्स- नवभारत)
Sabalgarh Ramkatha Tazia Dispute: मुरैना जिले के सबलगढ़ में मोहर्रम के ताजिया जुलूस और रामकथा आयोजन को लेकर बुधवार को विवाद की स्थिति बन गई। प्रशासन द्वारा ताजियों के पारंपरिक मार्ग में लगे रामकथा पंडाल को देखते हुए कथा दो दिन पहले समाप्त करने का सुझाव दिए जाने पर लोगों में नाराजगी फैल गई। देखते ही देखते सैकड़ों लोग सड़क पर उतर आए और एसडीएम कार्यालय का घेराव कर विरोध प्रदर्शन किया।
जानकारी के अनुसार नगर पालिका क्षेत्र के वार्ड क्रमांक 8 और 10 के बीच स्थित दाऊजी मंदिर और लक्ष्मी नारायण मंदिर के सामने नौ दिवसीय रामकथा का आयोजन चल रहा है, जिसका समापन 27 जून को होना निर्धारित है। वहीं मोहर्रम के तहत 25 जून की रात ताजिए बैठने हैं और 26 जून को ताजिया जुलूस निकाला जाना है।
SDM ऑफिस का घेराव
जिला प्रशासन का कहना था कि किले क्षेत्र से निकलने वाला एक ताजिया दाऊजी मंदिर के सामने से होकर गुजरता है, जहां वर्तमान में रामकथा का विशाल पंडाल लगा हुआ है। इसे देखते हुए प्रशासन ने आयोजकों को 25 जून की शाम तक कथा संपन्न करने का सुझाव दिया था। इस प्रस्ताव के सामने आते ही हिंदू संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने विरोध शुरू कर दिया। बुधवार शाम बड़ी संख्या में लोग पहले एसडीएम बंगले पहुंचे और बाद में एसडीएम कार्यालय का घेराव कर नारेबाजी की। देर रात तक प्रदर्शन जारी रहा। मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल भी तैनात किया गया, ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे।
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प्रशासन पर आरोप
सकल हिंदू समाज और विभिन्न संगठनों ने जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपकर मांग की कि रामकथा का समापन पूर्व निर्धारित तिथि 27 जून को ही कराया जाए। उनका कहना था कि व्यास पीठ को समय से पहले हटाना धार्मिक भावनाओं के विपरीत होगा। प्रदर्शनकारियों ने ताजिया जुलूस के लिए वैकल्पिक मार्ग का सुझाव भी दिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि दाऊजी मंदिर से चांदनी चौक तक एक वैकल्पिक और पर्याप्त चौड़ा मार्ग उपलब्ध है, जिसका उपयोग पहले भी विभिन्न धार्मिक और सामाजिक आयोजनों में किया जाता रहा है। लोगों का आरोप था कि प्रशासन ने इस विकल्प पर विचार नहीं किया।
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प्रशासन के हस्तक्षेप से बनी सहमति
विवाद के कारण रामकथा का आयोजन भी अपने निर्धारित समय से करीब तीन घंटे देरी से शुरू हुआ। देर रात प्रशासनिक अधिकारियों, दोनों समुदायों के प्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों के बीच लंबी चर्चा के बाद सहमति बनी। आखिर में फैसला लिया गया कि रामकथा का पंडाल यथावत रहेगा और ताजिया जुलूस को वैकल्पिक मार्ग से निकाला जाएगा। प्रशासन ने दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक आस्था और कानून व्यवस्था के बीच संतुलन बनाते हुए आपसी सहमति से समाधान निकाला गया है।
