

Highlights:
चंबल किनारे 70 गांवों की 12,800 हेक्टेयर राजस्व जमीन वन विभाग को सौंपने का प्रस्ताव।
सीईसी सदस्य सुनील लिमये की मौजूदगी में मुरैना के देवरी घड़ियाल सेंटर पर समीक्षा बैठक।
वन, खनिज और परिवहन विभाग का अमला बढ़ाने का सुझाव।
40 एम-सैंड लीज पर 6.60 लाख क्यूबिक मीटर रेत उपलब्ध होने की जानकारी।
4 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में अवैध रेत उत्खनन मामले की रिपोर्ट पेश होगी।
Morena Sand Mafia : मुरैना में चंबल नदी से रेत के अवैध उत्खनन और रेत माफिया की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए प्रशासन नई रणनीति पर काम कर रहा है। चंबल किनारे बसे 70 गांवों में राजस्व विभाग की करीब 12,800 हेक्टेयर जमीन वन विभाग को सौंपने का प्रस्ताव रखा गया है।
बताया गया कि इन जमीनों पर रेत का भंडारण किया जाता है। जमीन वन विभाग को सौंपने से ऐसी गतिविधियों पर निगरानी और नियंत्रण मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
मंगलवार को देवरी घड़ियाल सेंटर में केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (CEC) के सदस्य सुनील लिमये की मौजूदगी में समीक्षा बैठक हुई। इसमें मध्य प्रदेश के मुरैना, भिंड और श्योपुर के साथ राजस्थान के धौलपुर तथा उत्तर प्रदेश के आगरा के अधिकारी शामिल हुए। अधिकारियों ने अवैध रेत उत्खनन और परिवहन रोकने के लिए की गई कार्रवाई की जानकारी दी। बैठक में विभागों का अमला बढ़ाने का प्रस्ताव शासन को भेजने पर सहमति बनी।
मुरैना प्रशासन ने चंबल के घाटों पर स्थापित 16 वन चौकियों, एआई टावर और हाईवे पर एआई चेकपोस्ट के जरिए की जा रही निगरानी का ब्यौरा दिया। प्रशासन की ओर से बताया गया कि चंबल के घाटों से रेत का उत्खनन पूरी तरह रोका गया है। राजस्थान के अधिकारियों ने भी रेत माफिया की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए एआई आधारित निगरानी व्यवस्था के इस्तेमाल की जानकारी साझा की। बैठक में विभिन्न विभागों के कुल 32 अधिकारी मौजूद रहे।
कलेक्टर लोकेश कुमार जांगिड़ ने बताया कि निर्माण कार्यों में रेत की कमी न हो, इसके लिए 40 एम-सैंड लीज दी गई हैं। इन स्थानों पर 6.60 लाख क्यूबिक मीटर रेत उपलब्ध है। इसके अलावा सिंध नदी की रेत के वैध भंडारण के लिए 18 स्थानों पर लाइसेंस जारी किए गए हैं, जहां 1.60 लाख क्यूबिक मीटर रेत उपलब्ध है। बड़े सरकारी निर्माण कार्यों में एम-सैंड का उपयोग भी किया जा रहा है, ताकि चंबल की रेत पर निर्भरता कम की जा सके।
बैठक में अवैध उत्खनन, रेत के भंडारण और परिवहन पर प्रभावी निगरानी के लिए वन, खनिज और परिवहन विभाग में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने का सुझाव दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, पर्याप्त अमला होने से निगरानी और कार्रवाई को मजबूत किया जा सकेगा। जमीन वन विभाग को सौंपने और विभागीय अमला बढ़ाने से जुड़े प्रस्ताव शासन को भेजे जाएंगे।
चंबल में अवैध रेत उत्खनन के मामले में सीईसी सदस्य सुनील लिमये का यह तीसरा दौरा है। वह तीन दिवसीय दौरे पर मध्य प्रदेश आए हैं। बुधवार को श्योपुर और गुरुवार को भिंड जिले में चंबल नदी के घाटों का निरीक्षण करेंगे। 4 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान सीईसी सदस्य अपनी रिपोर्ट पेश करेंगे। बैठक के बाद लिमये ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन किया जा रहा है और अवैध उत्खनन पर अंकुश लगाने के प्रयासों का असर दिखाई दे रहा है। उन्होंने जल्द दोबारा मुरैना आकर चंबल के घाटों और बीहड़ क्षेत्र का भ्रमण करने की बात भी कही।