मध्य प्रदेश सरकार ने दिखाई आस्था, नर्मदा किनारे बसे धार्मिक नगरों में मांस-मदिरा पर लगाया बैन
मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने नर्मदा नदी को साफ और प्रवाह बनाए रखने के लिये कई फैसले लिए हैं। ताजा फैसले में नदी के किनारे बसे धार्मिक नगरों और स्थलों के आसपास मांस-मदिरा का उपयोग न हो इसके आदेश भी दिये गए हैं।
- Written By: साक्षी सिंह
मोहन यादव (सौजन्य-सोशल मीडिया)
भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने प्रदेश को लेकर एक बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने नर्मदा नदी को साफ और प्रवाह बनाए रखने के लिये कई फैसले लिए हैं। ताजा फैसले में नदी के किनारे बसे धार्मिक नगरों और स्थलों के आसपास मांस-मदिरा का उपयोग न हो इसके आदेश भी दिये गए हैं।
मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में शुक्रवार को एक बैठक हुई। इसमें उन्होंने ये भी कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि अमरकंटक में नर्मदा नदी के उद्गम स्थल से लेकर प्रदेश की सीमा में जहां भी बह रही हैं, वहां सीवेज इसमें न मिले।
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21 जिलों पर पड़ेगा असर
मध्य प्रदेश सरकार द्वारा मांस-मदिरा पर लगाए गए रोक का असर 21 जिलों पर पड़ेगा। नर्मदा के किनारे 21 जिले, 68 तहसीलें, 1138 गांव और 1126 घाट आते हैं। यही नहीं नर्मदा के किनारे कई प्राचीन मंदिर और शक्तिपीठ भी आते हैं। लोगों की आस्था नर्मदा नदी को लेकर बहुत ज्यादा है।
नर्मदा के संरक्षण के लिये यह पहली बैठक
हिंदू मान्यता के मुताबिक, नर्मदा एकमात्र नदी है, जिसकी परिक्रमा की जाती है। इसलिए परिक्रमा करने वालों की सुविधा के लिए परिक्रमा पथ विकसित करने के आदेश भी दिये गए हैं। नर्मदा के संरक्षण के लिये यह पहली बैठक थी।
ड्रोन से रखी जाएगी निगरानी
इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने नदी के पर्यावरण संरक्षण के लिये नर्मदा के आसपास चलने वाली गतिविधियों पर सैटेलाइट इमेज और ड्रोन से नजर रखने के आदेश भी दिए गए हैं।
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बता दें कि मोहन यादव सरकार प्रदेश को लेकर एक बाद एक बड़े फैसले ले रहे हैं। इससे पहले सीएम मोहन ने 9 सितंबर को जिलों की सीमाओं के लिए मध्य प्रदेश में एक नए परिसीमन आयोग का गठन किया। इसकी जानकारी खुद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने दी थी। इसके जरिए नए राज्यों को लेकर और उनकी सीमाओं की समीक्षा की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा था कि क्षेत्रफल के लिहाज से मध्यप्रदेश देश का दूसरा सबसे बड़ा राज्य है।
