गुजरात पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट : मप्र के परिवार का दर्द, होली पर बेटा खोया और फिर विस्फोट में पोते समेत 11 लोग
गुजरात पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में मध्य प्रदेश के हरदा जिले के 11 लोगों की मौत हो गई। घर में कोई चिराग जलाने वाला तक नहीं बचा। परिवार की एक मात्र मुखिया गीताबाई का दर्ज सुन हर किसी की आंखें छलक पड़ती हैं।
- Written By: यतीश श्रीवास्तव
मध्य प्रदेश की फैमिली ने गुजरात ब्लास्ट में 11 लोगों को खो दिया
भोपाल : गुजरात में हुए पटाखा फैक्ट्री ब्लास्ट में मध्य प्रदेश के हरदा जिले का पूरा परिवार ही खत्म हो गया। हरदा के इस परिवार का दर्द सुनकर हर किसी की आंखों से आंसू छलक उठ रहा है। परिवार में अब कोई नाम लेने वाला नहीं रह गया है। हालात ये है कि एक तरफ से पूरा परिवार ही खत्म हो गया है। विस्फोट में एक परिवार के 11 लोगों की मौत हो गई। गुजरात से मृतकों के शव मध्य प्रदेश के हरदा जिले स्थित उनके गांव के लिए रवाना कर दिए गए हैं।
घर में किसी की मौत हो जाए कई दिनों तक परिवार सदमे से उबर नहीं पाता है। हरदा जिले के उस परिवार का दर्द शायद कोई समझ भी नहीं सकेगा जिसने परिवार के एक-दो नहीं बल्कि 11 सदस्यों को खो दिया है। चाचा-भतीजा, पोते-पोतियां, भांजे-भांजियां सभी फैक्ट्री ब्लास्ट में अपनी जान गंवा बैठे।
बेटे की तेरहवीं के लिए नहीं थे पैसे, कमाने गए थे गुजरात
परिवार की मुखिया गीताबाई अपना दुख भी ठीक से बयां नहीं कर पा रही है। वह कहती है कि होली के समय ही उसका बेटा सत्यनारायण को भगवान ने उससे छीन लिया। उसकी तेरवीं तक ठीक से करने का इंतजाम नहीं था। परिवार के सारे लोग फैक्ट्री में काम कर तेरवीं के लिए कुछ पैसे जोड़ने के लिए गए थे। क्या पता था कि दोबारा किसी से मिलना तक नसीब नहीं होगा। अब किसके सहारे जियूं।
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तीन-तीन जवान पोते भी खो दिए
गीताबाई ने बताया कि उसके तीन पोते विष्णु, राजेश और बिट्टू तीनों परिवार के अन्य लोगों के साथ ही फैक्ट्री में ही काम करने गुजरात चले गए थे। वो ही मेरे जीने का सहारा थे। परिवार में एक भी सदस्य नहीं बचा है तो मेरे जीने का ही क्या मतलब है। गीताबाई अपना दर्द बयां करते हुए बार-बार बेहोश हो जा रही थी। आसपास के लोग उसे किसी तरह ढांढस बंधा रहे थे।
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200 मीटर तक फैला मलबा, शरीर के उड़े चीथड़े
गुजरात ब्लास्ट में हरदा के मारे गए लोगों का शव भी बुरी तरह से क्षत-विक्षत हो गया है। बताया जा रहा है कि ब्लास्ट इतना तेज था कि 200 मीटर तक मलबा बिखरा पड़ा हुआ था। इसमें कई मजदूर बुरी तरह से मृत मलबे में ही पड़े हुए थे। कई मजदूरों के चीथड़े तक उड़ गए थे।
