कूनो नेशनल पार्क, फोटो- सोशल मीडिया
Project Cheetah India: मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क से वन्यजीव प्रेमियों के लिए एक अत्यंत हर्ष का समाचार सामने आया है। 9 मार्च, 2026 को नामीबियाई चीता ‘ज्वाला’ ने पांच स्वस्थ शावकों को जन्म दिया है। यह घटना ‘प्रोजेक्ट चीता’ के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हो रही है, जो भारत में इन लुप्तप्राय प्रजातियों के पुनरुद्धार की दिशा में एक बड़ी जीत है।
इस नई उपलब्धि के साथ, भारत में पैदा हुए शावकों की कुल संख्या 33 हो गई है, जबकि देश में चीतों की कुल आबादी अब 53 के आंकड़े तक पहुंच गई है। अधिकारियों के अनुसार, यह 10वां सफल प्रसव है, जो इस बात का स्पष्ट प्रमाण है कि कूनो नेशनल पार्क का पारिस्थितिकी तंत्र नामीबियाई चीतों के अनुकूल है और वे यहां पूरी तरह ढल चुके हैं।
गौरतलब है कि ‘प्रोजेक्ट चीता’ की शुरुआत साल 2022 में की गई थी। इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य भारत में चीतों की उस प्रजाति को फिर से बसाना था, जो वर्ष 1952 में देश से पूरी तरह विलुप्त घोषित हो गई थी। इस परियोजना के तहत नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका से चीतों को भारत लाकर कूनो नेशनल पार्क में बसाया गया था।
विशेषज्ञों की मानें तो ज्वाला द्वारा पांच शावकों को जन्म देना केवल संख्या में बढ़ोतरी नहीं है, बल्कि यह इस बात का भी प्रमाण है कि भारत में चीतों के संरक्षण और पुनर्वास की रणनीति सही दिशा में आगे बढ़ रही है। इससे प्रजाति की दीर्घकालिक उत्तरजीविता की उम्मीद भी मजबूत हुई है।
इस उपलब्धि पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने वीडियो शेयर कर खुशी जताते हुए वन विभाग और ‘प्रोजेक्ट चीता’ से जुड़े सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि कूनो नेशनल पार्क में चीतों के शावकों का जन्म राज्य और देश दोनों के लिए गर्व की बात है। यह भारत में वन्यजीव संरक्षण के प्रयासों की सफलता को दर्शाता है।
Good News from Kuno National Park again… Cheetah Jwala has given birth to 5 cubs, marking another major milestone for Project Cheetah. With this, India’s cheetah population has crossed the half-century mark, reaching 53. A proud moment for wildlife conservation and a strong… pic.twitter.com/UfZz64zpJ6 — Dr Mohan Yadav (@DrMohanYadav51) March 9, 2026
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कूनो नेशनल पार्क के घने जंगलों में इन नन्हे चीतों का जन्म पूरे देश के लिए गर्व और उत्साह का विषय बन गया है। वन विभाग और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विशेषज्ञ इसे भारत के संरक्षण प्रयासों की एक बड़ी सफलता मान रहे हैं। आने वाले समय में इन शावकों की सुरक्षा और देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि भारत में चीतों की आबादी और मजबूत हो सके।