मंडला जिला अस्पताल की बदहाली पर जबलपुर हाई कोर्ट सख्त, राज्य सरकार से चार हफ्ते में जवाब तलब
Mandla District Hospital Case: जबलपुर हाई कोर्ट ने मंडला जिला अस्पताल की खराब स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर राज्य सरकार को नोटिस जारी कर 4 हफ्ते में जवाब मांगा है। जून में अगली सुनवाई होगी।
- Written By: प्रीतेश जैन
जबलपुर हाई कोर्ट (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Jabalpur High Court News: मंडला जिला अस्पताल की खराब स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर जबलपुर हाई कोर्ट में जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। चीफ जस्टिस संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार, स्वास्थ्य विभाग और मंडला सीएमएचओ को नोटिस जारी करते हुए चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। अगली सुनवाई जून में निर्धारित की गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि आदिवासी बहुल मंडला जिला अस्पातल में डॉक्टरों की भारी कमी, संसाधनों का अभाव और प्रसूति वार्ड की गंभीर स्थिति के कारण मरीजों को बुनियादी इलाज तक नहीं मिल पा रहा है।
विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी
याचिकाकर्ता पंकज कुमार सोनी की ओर से कोर्ट में बताया गया कि मंडला जिले की आबादी करीब 10 लाख है, जिसमें लगभग 70 प्रतिशत आदिवासी समुदाय से जुड़े लोग हैं। इसके बावजूद अस्पताल में कार्डियोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट, गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट, यूरोलॉजिस्ट और रेडियोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों के पद लंबे समय से खाली हैं। अस्पताल में स्वीकृत 42 डॉक्टरों के पदों के मुकाबले केवल 17 डॉक्टर ही कार्यरत हैं, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं गंभीर रूप से प्रभावित हो रही हैं।
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सोनोग्राफी मशीनें बंद, मरीजों को निजी सेंटर का सहारा
रेडियोलॉजिस्ट की अनुपस्थिति के कारण अस्पताल की सोनोग्राफी मशीनें भी बंद पड़ी हैं। ऐसे में मरीजों को मजबूरी में निजी डायग्नोस्टिक सेंटरों से महंगे टेस्ट कराने पड़ रहे हैं। गंभीर स्थिति में मरीजों को इलाज के लिए जबलपुर या नागपुर रेफर किया जाता है, जिससे समय और धन दोनों का नुकसान हो रहा है।
प्रसूति वार्ड की स्थिति पर चिंता
याचिका में प्रसूति वार्ड की स्थिति को अत्यंत चिंताजनक बताया गया है। आरोप है कि बिस्तरों की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं और नवजात शिशुओं को फर्श पर ही रखना पड़ता है, जिससे संक्रमण और स्वास्थ्य जोखिम बढ़ रहे हैं। इसे संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 47 के तहत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन बताया गया है।
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लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग
याचिकाकर्ता ने जबलपुर हाई कोर्ट में बताया कि कई बार प्रशासन को ज्ञापन और शिकायतें देने के बावजूद कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए। याचिका में प्रसूति वार्ड में अतिरिक्त बिस्तर, विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति और लापरवाह अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की गई है।
