Fuel Saving Appeal vs Reality: कथनी और करनी में बड़ा अंतर, क्या मंत्रियों के तामझाम से बचेगा देश का ईंधन?
Minister Convoy Fuel Waste: मंत्रियों की 'कार पूलिंग' बचा सकती है महीने का 15,000 लीटर डीजल-पेट्रोल, पर हकीकत में दौड़ रहे 8-8 वाहनों के काफिले,कार पूलिंग से 3 चौथाई ईंधन बचने की संभावना।
- Written By: सुधीर दंडोतिया
कारों का काफिला , सोर्स: नवभारत
MP Government Fuel Consumption: एक तरफ जहां पीएम नरेंद्र मोदी और सीएम डॉ. मोहन यादव वैश्विक संकट के बीच ईंधन बचाने की दुहाई दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर मध्य प्रदेश के माननीय इस अपील को ‘फोटो अवसर’ से ज्यादा कुछ नहीं समझ रहे।
उज्जैन के सौभाग्य सिंह की तस्वीर देश भर में छाई रही वंही विदिशा के राकेश जादोन दिखावे के लिए बीजेपी कार्यालय ई रिक्शा से पहुंचे पर विदिशा से भोपाल तक सैकड़ों वाहनों के साथ आये ! यही हाल मंत्रियो का है जंहा खंडवा में मंत्री धर्मेंद्र लोधी सोशल मीडिया पर ईधन बचाने की अपील करते नजर आये पर खंडवा प्रवास में दर्जनों गाड़ियों के काफिले के साथ घूमते रहे
पीएम-सीएम की अपील
अमरीका – ईरान युद्ध से गहराते वैश्विक संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील की। सोमवार को कैबिनेट में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी मंत्रियों से पीएम की अपील का पालन करने के लिए प्रेरित करने की बात कही। उन्होंने कहा, पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करें। वर्क फ्रॉम होम, वर्चुअल मीटिंग और इलेक्टिक वीकल के इस्तेमाल पर जोर दिया। पीएम-सीएम की अपील का पहली ही नजर में इसका असर भी नजर आया।
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ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर ई-स्कूटी पर सवार दिखे। मद्य प्रदेश लघु उद्योग निगम के नवनियुक्त अध्यक्ष सत्येंद्र भूषण सिंह, खादी ग्रामोद्योग के अध्यक्ष पंकज जोशी और उपाध्यक्ष राकेश सिंह जादौन ई-रिक्शा से निकले। लेकिन, ये सब ड्रामा ही निकला। माननीय खुद ई-रिक्शा पर बैठे, पीछे समर्थकों का कारवां गाड़ियों से चलता रहा।
कार पुलिंग करें तो होगी बचत
स्टेट गैराज की 89 गाड़ियों से भी हर महीने 20 हजार लीटर डीजल-पेट्रोल खर्च हो रहा है। जानकारों की मानें तो पीएम की अपील से लोगों को तब प्रेरणा मिलेगी, जब मंत्री-अफसर, निगम-मंडलों के अध्यक्ष कार पुलिंग कर एक साथ चलेंगे। ऐसा करने पर 3 चौथाई यानी 15 हजार लीटर ईंधन एक माह में बच सकेगा।
एक मंत्री के काफिले में 7-8 वाहन!
मंत्रियों को स्टेट मोटर गैराज से सिर्फ एक गाड़ी मिलती है। उनके साथ पुलिस की एक गाड़ी भी चलती है। साथ ही जिस विभाग के मंत्री होते हैं, उस विभाग के अफसरों की गाड़ी भी साथ ही चलती है। बताते हैं, कई मंत्री एक सरकारी गाड़ी में पीआर टीम भी लेकर चलते हैं। इसके अलावा समर्थकों की 1-2 गाड़ियां साथ चल रही हैं। यानी, एक मंत्री के काफिले में 7-8 गाड़ियां दौड़ रही हैं।
कोटा 250 लीटर, बाहर अनलिमिटेड
स्टेट मोटर गैराज से मिली जानकारी के अनुसार, मंत्रियों को 2024 में 31 नई गाड़ियां दी गईं। इनमें कैबिनेट और राज्यमंत्री शामिल हैं। मंत्रियों की गाड़ी के लिए हर माह 250 लीटर तेल का कोटा तय है। लेकिन बाहरी दौरे पर जाने पर इसकी सीमा तय नहीं है। ऐसे में मंत्री गाडिय़ों में असीमित पेट्रोल-डीजल भरवा सकते हैं। स्टेट गैराज के आंकड़े बताते हैं, हर दो माह में 12 हजार लीटर के 3 टैंकर और 6 माह में पेट्रोल का 1 टैंकर यहां मंगवाया जा रहा है। चुनाव के समय में ईंधन की खपत और बढ़ जाती है।
हर माह खप रहा 20 हजार लीटर तेल
मप्र स्टेट मोटर गैराज से मंत्री और अन्य सरकारी विभागों में 89 गाड़ियां लगाई गई हैं। इनमें फर्राटे भरने वाले माननीय हर माह 18 हजार लीटर डीजल खर्च कर रहे हैं। यूं तो पेट्रोल गाड़ियां यहां कम हैं, लेकिन हर माह पेट्रोल की खपत करीब 20 हजार लीटर हो रही है।
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अफसरों को हर माह 120 लीटर
अफसरों की बात करें तो गृह विभाग, विभाग और सामान्य प्रशासन विभाग के अफसरों के पास लगी गाड़ियों के लिए भी तेल का कोटा तय है। सामान्य अफसरों को हर माह 60 लीटर तेल तो एसीएस रैंक के अफसरों को 120 लीटर प्रति माह कोटा तय है। विशेष हालात में इसे बढ़ाया भी जाता है।
