सीएम मोहन यादव का बयान (फोटो- सोशल मीडिया)
Rubina Iqbal Khan Vande Mataram Row: इंदौर नगर निगम के बजट सम्मेलन में ‘वंदे मातरम’ को लेकर उठा विवाद अब प्रदेश की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन गया है। कांग्रेस की दो महिला पार्षदों द्वारा राष्ट्रीय गीत गाने से इनकार करने के बाद यह मामला सियासी बहस के केंद्र में आ गया है। नगर निगम की बैठक के दौरान ‘वंदे मातरम’ गाया जाना था। इसी दौरान कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान और फौजिया शेख अलीम ने धार्मिक कारणों का हवाला देते हुए इसे गाने से इनकार कर दिया। सदन में मौजूद अन्य सदस्यों ने इसका विरोध किया, लेकिन कांग्रेस की ओर से तुरंत कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई।
बहस के बीच कांग्रेस पार्षद रुबीना इकबाल खान ने सदन में तीखी प्रतिक्रिया देते हुए आपत्तिजनक टिप्पणी की, जिसके बाद माहौल और गरमा गया। इस बयान के बाद भाजपा पार्षदों ने सदन में जोरदार विरोध करते हुए ‘वंदे मातरम’ के नारे लगाने शुरू कर दिए। स्थिति कुछ समय के लिए काफी तनावपूर्ण हो गई। विवाद यहीं नहीं रुका।
बाद में रुबीना इकबाल खान का एक और बयान सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा कि उनके धार्मिक विश्वास के अनुसार वे ‘वंदे मातरम’ नहीं बोल सकतीं। उन्होंने यह भी कहा कि किसी पर इसे बोलने का दबाव बनाना उचित नहीं है और वे किसी तरह की “दादागिरी” स्वीकार नहीं करेंगी। इस पूरे घटनाक्रम के बाद मामला अब और ज्यादा राजनीतिक तूल पकड़ता जा रहा है, और इसे लेकर अलग-अलग दलों की प्रतिक्रियाएं लगातार सामने आ रही हैं।
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मुद्दे पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय गीत गाने से इनकार करना दुर्भाग्यपूर्ण है और यह देशभक्ति की भावनाओं का अपमान है। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी का रवैया दोहरा है और ऐसे मामलों में उसकी चुप्पी सवाल खड़े करती है।
सीएम यादव ने प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व से इस मुद्दे पर स्पष्टीकरण देने की मांग की। उन्होंने कहा कि हर मुद्दे पर प्रतिक्रिया देने वाली कांग्रेस इस मामले में चुप क्यों है।
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मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि ‘वंदे मातरम’ और “भारत माता की जय” जैसे नारों से देशभक्ति की भावनाएं जुड़ी हैं और इनका विरोध गलत संदेश देता है। फिलहाल यह मामला नगर निगम से निकलकर बड़े राजनीतिक विमर्श का रूप लेता जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कांग्रेस इस विवाद पर आधिकारिक रुख कब स्पष्ट करती है।