इंदौर कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष नियुक्ति पर बवाल, सोनिला मिमरोट की नियुक्ति को लेकर कांग्रेस में विरोध
Opposition Post Clash: इंदौर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष पद पर सोनिला मिमरोट की नियुक्ति के बाद कांग्रेस में विरोध शुरू हो गया है। प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के निर्णय के बाद विरोध किया जा रहा है।
- Reported By: अंशुल मुकाती
इंदौर नगर निगम में सोनिला मिमरोट को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया है
Indore Congress Appointment Controversy:इंदौर नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष के पद पर सोनिला मिमरोट की नियुक्ति के बाद कांग्रेस संगठन के भीतर विरोध के स्वर तेज हो गए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा लागू किए गए “एक व्यक्ति-एक पद” फॉर्मूले के तहत पूर्व नेता प्रतिपक्ष चिंटू चौकसे को पद से हटाकर यह जिम्मेदारी सोनिला मिमरोट को सौंपी गई है। चिंटू चौकसे वर्तमान में कांग्रेस के शहर अध्यक्ष भी हैं, ऐसे में संगठन ने दोनों पद एक ही व्यक्ति के पास नहीं रखने का निर्णय लिया।
घोषणा के साथ ही शुरू हुआ विरोध
सोनिला मिमरोट के नाम की घोषणा होते ही कांग्रेस के कई कार्यकर्ताओं ने खुलकर नाराजगी जाहिर करना शुरू कर दिया। खासतौर पर विधानसभा क्रमांक-1 क्षेत्र में इस फैसले को लेकर असंतोष देखने को मिला। कई कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया पर पोस्ट और संदेश साझा कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई।
सोशल मीडिया पर इस्तीफों की घोषणा
विधानसभा-1 के कुछ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने पदों से इस्तीफा देने की घोषणा भी कर दी। कार्यकर्ताओं का कहना है कि संगठन ने स्थानीय कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं से चर्चा किए बिना निर्णय लिया है, विधानसभा 1 से ही दीपू यादव की पत्नी इस पद के लिए दावेदार थी। वहीं कुछ नेताओं का मानना है कि इस नियुक्ति से पार्टी के भीतर गुटबाजी और बढ़ सकती है।
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कांग्रेस संगठन के सामने चुनौती
नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर खड़े हुए इस विवाद ने कांग्रेस संगठन के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है। पार्टी नेतृत्व अब असंतुष्ट कार्यकर्ताओं को मनाने और संगठन में एकजुटता बनाए रखने की कोशिश में जुट सकता है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि जल्द ही नाराज कार्यकर्ताओं को संतुष्ट नहीं किया गया तो इसका असर आगामी राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी तैयारियों पर भी पड़ सकता है।
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कांग्रेस की ओर से नहीं आया आधिकारिक बयान
फिलहाल इस विरोध को लेकर इंदौर कांग्रेस की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि संगठन के वरिष्ठ नेता इसे आंतरिक मामला बताते हुए जल्द समाधान निकालने की बात कह रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि पार्टी नेतृत्व विरोध कर रहे कार्यकर्ताओं को किस तरह साधता है और संगठनात्मक संतुलन कैसे बनाए रखता है।
