इंदौर: ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के अंतिम दिन पर्यावरण संरक्षण का संदेश, मेघदूत उपवन में बनी ‘ब्रिक्स वाटिका’
BRICS Vatika Indore: इंदौर में आयोजित ब्रिक्स कृषि सम्मेलन के अंतिम दिन ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों ने मेघदूत उपवन में पौधारोपण किया। यहां विकसित की गई ब्रिक्स वाटिका सम्मेलन की स्थायी पहचान बनेगी।
- Reported By: अंशुल मुकाती | Edited By: प्रीतेश जैन
पौधारोपण करते शिवराज सिंह (फोटो सोर्स- नवभारत)
Indore BRICS Agriculture Conference: इंदौर में आयोजित ब्रिक्स कृषि मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के अंतिम दिन पर्यावरण संरक्षण, वैश्विक सहयोग और सतत विकास का संदेश दिया गया। सम्मेलन में शामिल ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों और प्रतिनिधियों ने मेघदूत उपवन में पौधारोपण कर पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित कई वरिष्ठ अधिकारी और प्रतिनिधिमंडल के सदस्य मौजूद रहे।
सम्मेलन की यादों को लंबे समय तक संजोकर रखने के उद्देश्य से जिस स्थान पर पौधारोपण किया गया, उसे अब ‘ब्रिक्स वाटिका’ के नाम से जाना जाएगा। यहां लगाए गए पौधे ब्रिक्स देशों के बीच मित्रता, सहयोग और साझा विकास के प्रतीक के रूप में विकसित किए जाएंगे। आयोजकों का मानना है कि यह वाटिका भविष्य में इंदौर में आयोजित इस ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की पहचान बनेगी।
ब्रिक्स देशों के मजबूत संबंधों का प्रतीक है पौधारोपण
मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पौधारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का अभियान नहीं है, बल्कि यह ब्रिक्स देशों के बीच मजबूत संबंधों और सतत भविष्य के संकल्प का प्रतीक भी है। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग आवश्यक है और ब्रिक्स देश इस दिशा में मिलकर कार्य कर रहे हैं।
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साझा घोषणा पत्र की दी जानकारी
शिवराज सिंह चौहान ने सम्मेलन के दौरान तैयार किए जा रहे साझा घोषणा-पत्र की भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कृषि नवाचार, खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ खेती, आधुनिक तकनीकों के उपयोग और सदस्य देशों के बीच सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों को लेकर एक व्यापक घोषणा-पत्र तैयार किया जा रहा है।
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वैश्विक कृषि क्षेत्र को नई दिशा देगा इंदौर डिक्लेरेशन
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चूंकि यह घोषणा इंदौर में आयोजित ब्रिक्स कृषि मंत्रिस्तरीय सम्मेलन के दौरान पारित की जा रही है, इसलिए इसे ‘इंदौर डिक्लेरेशन’ के नाम से जाना जाएगा। उनका मानना है कि यह घोषणा-पत्र वैश्विक कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने और सदस्य देशों के बीच सहयोग को और मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। सम्मेलन के समापन के साथ इंदौर ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर कृषि, पर्यावरण और वैश्विक साझेदारी के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है।
