पुलिस पर दबाव बनाने के लिए लगाई याचिका, हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता पर लगाया 50 हजार का जुर्माना
Gwalior High Court Fine On Shailendra Singh: ग्वालियर हाई कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। सुनवाई में हाई कोर्ट ने पाया कि पुलिस पर दबाव बनाने के लिए याचिका लगाई गई थी।
- Written By: प्रीतेश जैन
ग्वालियर खंडपीठ, मप्र हाई कोर्ट (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Gwalior High Court News: मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दुरुपयोग करने के मामले में याचिकाकर्ता पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। HC ने कहा याचिका का उद्देश्य पुलिस पर दबाव डालना था। इस तरह की याचिकाओं से पुलिस का कार्यप्रणाली प्रभावित होती है।
HC ने जुर्माना लगाते हुए कहा पुलिस पर झूठे आरोप लगाकर न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करना कानून व्यवस्था और न्याय प्रणाली के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
क्या था मामला?
शैलेंद्र सिंह ने ग्वालियर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि ग्वालियर के महाराजपुरा थाना पुलिस ने उसकी बहन, उसके 2 वर्षीय बेटे और तीन अन्य परिजनों को अवैध रूप से हिरासत में रखा हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने पुलिस से जवाब तलब किया। सुनवाई के दौरान पुलिस ने केस डायरी पेश करते हुए बताया कि संबंधित महिला पुलिस हिरासत में नहीं, बल्कि अपने घर पर सुरक्षित है। इसके बाद याचिकाकर्ता पक्ष ने महिला को कोर्ट में पेश किया।
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कोर्ट में महिला ने सुनाई अलग कहानी
कोर्ट में पेश महिला ने कहा कि उसका पति हत्या के मामले में फरार है। उसने आरोप लगाया कि पुलिस ने 10 मई को उसे उठाकर किसी अज्ञात स्थान पर बंधक बनाया और छोड़ने के बदले एक लाख रुपए की मांग की। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि 11 मई को दोबारा उसे उठाया गया और उसके रिश्तेदार श्यामू गुर्जर के साथ मारपीट की गई। मामले की सुनवाई जस्टिस जीएस अहलुवालिया और जस्टिस पुष्पेंद्र यादव की खंडपीठ ने की।
साक्ष्य पेश नहीं कर सके याचिकाकर्ता
पूछताछ के दौरान महिला उस कथित स्थान का नाम तक नहीं बता सकी, जहां उसे बंधक बनाए जाने का दावा किया गया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कई गंभीर विरोधाभास पाए। अदालत ने कहा कि याचिका में एक लाख रुपए मांगने का आरोप कहीं दर्ज ही नहीं था। साथ ही याचिकाकर्ता ने दावा किया था कि पूरी घटना सीसीटीवी कैमरे में कैद है, लेकिन कोई वीडियो साक्ष्य पेश नहीं किया गया। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह सामने आया कि 12 मई को ही याचिकाकर्ता को यह जानकारी मिल चुकी थी कि उसकी बहन घर लौट आई है इसके बावजूद ये तथ्य कोर्ट से छिपाया गया और सुनवाई जारी रखी गई।
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HC ने लगाया 50 हजार रुपए का जुर्माना
मामले में खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह पूरा मामला फरार हत्या आरोपी को बचाने और पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश लगता है। अदालत ने इसे न्यायिक प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग मानते हुए शैलेंद्र सिंह पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया और भविष्य में ऐसे मामलों पर सख्ती बरतने की चेतावनी दी।
