ग्वालियर के 102 साल पुराने गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी की भव्य तैयारी; करोड़ों के हीरे-जवाहरात से होगा श्रृंगार

Janmashtami Special: ग्वालियर के 102 साल पुराने गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी की भव्य तैयारियां, सिंधिया राजघराने के समय के करोड़ों रुपये के हीरे-जवाहरात से होगा भगवान राधा-कृष्ण का श्रृंगार।
102 year old Gopal Mandir prepares for grand Janmashtami celebration
ग्वालियर का गोपाल मंदिर(सोर्स- सोशल मीडिया)
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Gwalior Gopal Mandir Janmashtami: ग्वालियर के फूलबाग स्थित ऐतिहासिक गोपाल मंदिर में जन्माष्टमी को लेकर तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। करीब 102 साल पुराने इस मंदिर का संबंध सिंधिया राजघराने से बताया जाता है। जन्माष्टमी के अवसर पर हर साल यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान राधा-कृष्ण के दर्शन करने पहुंचते हैं।

मंदिर को इस खास पर्व के लिए भव्य तरीके से सजाया जाता है। वर्तमान में मंदिर की देखरेख नगर निगम द्वारा की जाती है। जन्माष्टमी के दिन मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है।

करोड़ों के हीरे-जवाहरात से होगा भगवान का श्रृंगार

गोपाल मंदिर की सबसे बड़ी खासियत जन्माष्टमी के दिन होने वाला भगवान राधा-कृष्ण का बेशकीमती श्रृंगार है। इस अवसर पर भगवान को करोड़ों रुपये कीमत के हीरे और जवाहरात से जड़े आभूषण पहनाए जाते हैं। बताया जाता है कि कई दशक पहले सिंधिया राजघराने की ओर से ये बेशकीमती आभूषण मंदिर को भेंट किए गए थे। इन जेवरात में कीमती पत्थरों और रत्नों का इस्तेमाल किया गया है, जो भगवान के श्रृंगार को बेहद खास और आकर्षक बनाते हैं।

साल में सिर्फ एक दिन होते हैं दुर्लभ आभूषणों के दर्शन

इन बेशकीमती आभूषणों की सुरक्षा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन्हें पूरे साल बैंक के लॉकर में सुरक्षित रखा जाता है। जन्माष्टमी के दिन विशेष सुरक्षा व्यवस्था के बीच इन्हें बैंक लॉकर से बाहर निकाला जाता है। इसके बाद विधि-विधान के साथ भगवान राधा-कृष्ण का श्रृंगार किया जाता है। श्रद्धालुओं को इन दुर्लभ आभूषणों से सजे भगवान के दर्शन साल में केवल एक बार, जन्माष्टमी के अवसर पर ही मिलते हैं।

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अगले दिन फिर बैंक लॉकर में जमा होते हैं जेवरात

जन्माष्टमी पर भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन के बाद अगले दिन इन बेशकीमती आभूषणों को दोबारा बैंक के लॉकर में सुरक्षित जमा करा दिया जाता है। इस दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाते हैं। यही वजह है कि गोपाल मंदिर की जन्माष्टमी को लेकर श्रद्धालुओं में खास उत्साह रहता है। यह मंदिर केवल आस्था का प्रमुख केंद्र ही नहीं, बल्कि सिंधिया राजघराने की ऐतिहासिक विरासत को भी अपने भीतर समेटे हुए है। करोड़ों के हीरे-जवाहरात से सजे राधा-कृष्ण के दर्शन इस मंदिर को देशभर में अलग पहचान दिलाते हैं।

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