MP News: घुवारा में मृत शिक्षक की जनगणना में लगाई ड्यूटी, प्रशासन पर उठे सवाल; बड़ामलहरा SDM ने झाड़ा पलड़ा
Madhya Pradesh News: छतरपुर जिले के घुवारा से एक ऐसी खबर निकल कर आ रही है, जिसने सबको हैरान कर दिया है। एक मृत शिक्षक की जनगणना में ड्यूटी लगा दी गई। इस मामले पर एसडीएम ने पलड़ा झाड़ लिया है।
- Written By: सजल रघुवंशी
मृत शिक्षक की लगाई ड्यूटी (सोर्स- सोशल मीडिया)
Big Blunder In Chhatarpur Teacher Census Duty: मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के घुवारा से एक ऐसी खबर निकल कर आ रही है, जिसने सबको हैरान कर दिया है। दरअसल, बड़ामलहरा अनुभाग के घुवारा प्रशासनिक लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मृत शिक्षक के नाम पर जनगणना की ड्यूटी लगा दी गई। जानकारी के अनुसार, संबंधित शिक्षक हरिश्चंद्र जैन माध्यमिक शिक्षक का निधन दिनांक 15अप्रैल 2023 में हो चुका था,
इसके बावजूद विभागीय सूची में उनका नाम शामिल कर उन्हें जिम्मेदारी सौंप दी गई। इस घटना से विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। गौरतलब है कि, इस मामले में न केबल प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं बल्कि इससे इस बात का भी अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रशासन में रिकॉर्ड अपडेट करने में अब भी टाइम लग रहा है।
बड़ामलहरा एसडीएम ने झाड़ा पलड़ा
गौरतलब है कि, हरिश्चंद्र जैन की मृत्यू आज से 3 साल पहले अप्रैल में ही हुई थी लेकिन इसके बाद भी प्रशासन से इतनी बड़ी चूक हो गई। बता दें कि इस मामले को लेकर जिम्मेवार अधिकारी एसडीएम बड़ामलहरा अखिल राठौर एवं तहसीलदार आदित्य सोनकिया पलड़ा झाड़ रहे है और प्रतिक्रिया नही दे रहे है। गौरतलब है कि, जब कर्मचारी जीवित ही नहीं है, तो उसकी ड्यूटी कैसे निर्धारित कर दी गई। यह न केवल लापरवाही का उदाहरण है बल्कि रिकॉर्ड अपडेट न होने की बड़ी चूक भी दर्शाता है।
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बड़वानी से भी सामने आया ऐसा ही मामला
मध्य प्रदेश के बड़वानी से भी ऐसा ही एक मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक, पाटी तहसीलदार बबली बरड़े ने शिक्षा विभाग के 32 कर्मचारियों को जनगणना प्रशिक्षण के लिए नामित किया था। यह प्रशिक्षण 27 से 29 अप्रैल तक रोजाना सुबह 10:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक आयोजित किया जा रहा है। हालांकि, जब जारी सूची की पड़ताल की गई तो क्रमांक 23 पर प्राथमिक विद्यालय रावतलिया फलियां चाकलया में पदस्थ शिक्षक संतोष मालवीय का नाम शामिल मिला, जबकि उनका 13 अप्रैल को ही निधन हो चुका था।
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इसलिए हुई गड़बड़ी
जानकारी के मुताबिक, यह गड़बड़ी पुराने रिकॉर्ड के आधार पर ड्यूटी सूची तैयार किए जाने के कारण हुई। मानव संसाधन पोर्टल पर संबंधित शिक्षक के निधन की जानकारी समय पर अपडेट नहीं की गई, जिससे उनका नाम सूची में बना रहा। यह लापरवाही न सिर्फ तकनीकी खामी को उजागर करती है, बल्कि जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
