'प्रकृति के साथ चलना आज की जरूरत', ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट अपना रहा MP; CM मोहन यादव ने कही यह बड़ी बात

Madhya Pradesh: CM मोहन यादव ने ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर आधारित अखिल भारतीय सेमिनार और इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की गवर्निंग काउंसिल मीटिंग का शुभारंभ किया। PWD ने IIT इंदौर के साथ MOU साइन किया
Cm Mohan Yadav Inaugurates Green Building Seminar Bhopal Pwd Mou Iit Indore
IIT इंदौर के साथ एमओयू साइन ,सोर्स: सोशल मीडिया
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Madhya Pradesh Adapting Green Building Concept: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने आज 2 मई को ग्रीन बिल्डिंग कॉन्सेप्ट पर आधारित अखिल भारतीय सेमिनार और इंडियन बिल्डिंग कांग्रेस की 113वीं गवर्निंग काउंसिल मीटिंग का शुभारंभ किया। इस दौरान लोक निर्माण विभाग ने आईआईटी इंदौर और गृहा संस्था के साथ एमओयू साइन किया।

इस मौके पर डॉ. मोहन यादव ने कहा कि राजा भोज ने भोज पत्रों पर लेख और निर्माण कार्यों के माध्यम से हमें प्राचीन भारतीय निर्माण परंपरा की अद्भुत सौगात दी है। हमारा संसार पंचतत्वों से बना है और पृथ्वी इनके केंद्र में है। पृथ्वी का भौगोलिक केंद्र उज्जैन के पास डोंगला में है। यह प्राचीन काल से समय गणना का मुख्य केंद्र माना जाता है। उन्होंने कहा कि इंदौर के पास मांडव महल स्थापत्य का उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां बीच में तालाब बना है और इससे मंदिर की दूसरी मंजिल तक शीलता रहती है। तुंगभद्रा नदी के किनारे श्रृंगेरी में भी स्थापत्य कला का अद्भुद उदाहरण देखने को मिलते हैं।

पीएम मोदी की तारीफ करते नजर आए सीएम

मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्राचीन ज्ञान और परंपरा को मौजूदा दौर में विज्ञान के साथ जोड़ा है। आज आवश्यकता है कि हम प्रकृति से सीखें और उसके साथ आगे बढ़ें। भोपाल के बड़े तालाब के निर्माण में मुख्यधारा को बंद नहीं किया गया। इसमें जल राशि को नियंत्रित करने के लिए अद्भुत तकनीक अपनाई गई है। इसी प्रकार उज्जैन में शिप्रा नदी के आसपास निर्माण कार्य किए गए हैं। नदी के धारा के अनुसार मंदिर और देवस्थान विद्धमान हैं।

सरकार ने लिया जल संरचनाओं को दुरुस्त करने का संकल्प

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विकास हमारी प्राथमिकता है लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवेलपमेंट में राशि का सदुपयोग हो इसके लिए ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर हम आगे बढ़ रहे हैं। प्रदेश में पर्यावरण अनुकूल निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। ग्लोबल वॉर्मिंग आज चुनौती बनकर सामने आई है। राज्य सरकार ने गुढ़ी पड़वा से लेकर गंगा दशहरा तक जल संवर्धन अभियान की शुरुआत की है। इसके अंतर्गत प्रदेशभर में कुओं, बावड़ियों और सभी जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने हर साल जल संरचनाओं पर कार्य करने का संकल्प लिया है। मध्यप्रदेश जल संरक्षण कार्यों में देश में प्रथम स्थान पर है। खंडवा जिले को प्रथम और बड़वानी को दूसरा स्थान मिला है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक स्तर पर सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है।

भारतीय प्राचीन निर्माण तकनीक पर हो रहा काम

कार्यक्रम में लोक निर्माण मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि प्रदेश में टिकाऊ निर्माण के लिए हम भारतीय प्राचीन निर्माण तकनीक पर आगे बढ़ रहे हैं। हमारी हड़प्पा सभ्यता में प्रकृति के संतुलन के साथ निर्माण कार्य किए जाते थे। अंकोरबाट का मंदिर भी प्रकृति के साथ संतुलन का अद्भुत और उत्कृष्ट उदाहरण है। इनके निर्माण में इस बात का विशेष ध्यान रखा गया कि आने वाली पीढ़ियों को इनका लाभ मिले। महलों के निर्माण में भी हमारी तकनीक काफी उन्नत रही है। प्रदेश में बनने वाले सभी भवन अब ग्रीन बिल्डिंग तकनीक पर बनाए जा रहे हैं।

यह पर्यावरण संरक्षण के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। थ्रीडी भवन निर्माण तकनीक भी भविष्य में लाभकारी सिद्ध होगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऊर्जा संकट खड़ा हो सकता है। इसका समाधान ग्रीन बिल्डिंग तकनीक से हो सकता है। इस तकनीक में बेहतर वेंटिलेशन और प्रकाश व्यवस्था का ध्यान रखा जाता है। पिछले साल हमने प्रदेश में 506 से अधिक लोक कल्याण सरोवर बनाए। हमारे इंजीनियर्स ने 2.5 लाख पौधे लगाए। प्रदेश में हाईवे और फ्लाईओवर्स को रेन वॉटर हार्वेस्टिंग तकनीक के साथ तैयार किया जा रहा है।

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