इंदौर की सीट ने बनाए एक दो तीन नहीं कई रिकॉर्ड, मोदी-शाह को भी पीछे छोड़ा
मध्य प्रदेश के इंदौर सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवार शंकर लालवानी ने करीब 12 लाख वोटों से जीत हासिल की है। वहीं, 2 लाख 18 हजार 674 वोट नोटा पर पड़े हैं। यह पहली बार है जब इतने वोट नोटा पर पड़े। भाजपा ने प्रदेश में 29-0 से क्लीन स्वीप कर बड़ी जीत दर्ज की है।
- Written By: शुभम सोनडवले
शंकर लालवानी की बड़ी जीत (फोटो: X)
इंदौर. देश में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार बनना लगभग तय माना जा रहा है। इस चुनाव में कई बड़े नेताओं को हार का सामना करना पड़ा है। लेकिन एक ऐसा नेता भी है जिसने अपनी जीत से रिकॉर्ड दर्ज कर लिया है। मध्य प्रदेश के इंदौर सीट से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) उम्मीदवार शंकर लालवानी ने करीब 12 लाख वोटों से जीत हासिल की है। इतनी बड़ी जीत अभी तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने भी हासिल नहीं की थी। इसके अलावा इंदौर में दो लाख से अधिक वोट नोटा पर पड़े हैं।
इंदौर का चुनाव पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। शंकर लालवानी ने सबसे बड़ी जीत दर्ज कर इतिहास रच दिया है। उन्होंने ने 12 लाख 26 हजार 751 वोट हासिल किए हैं। जबकि उनके निकटतम प्रतिद्वंद्वी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के संजय सोलंकी को मात्र 51 हजार 659 वोट ही मिले। लालवानी ने 11 लाख 75 हजार 092 से जीत दर्ज की है।
बता दें कि 2019 में गुजरात के नवसार सीट पर भाजपा के कद्दावर नेता सीआर पाटिल ने 6,89,668 वोटों से जीत दर्ज की थी। यह अब तक की सबसे बड़ी जीत थी। हालांकि, अब सबसे बड़ी जीत और वह भी सबसे ज्यादा वोटों के अंतर से जीत का ताज लालवानी के सिर पर रहेगा।
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वहीं, इंदौर में 2 लाख 18 हजार 674 वोट नोटा पर पड़े हैं। यह पहली बार है जब इतने वोट नोटा पर पड़े। इससे पहले सबसे ज्यादा नोटा का रिकॉर्ड बिहार के गोपालगंज के नाम था। 2019 के चुनाव में यहां 51 हजार 660 लोगों ने नोटा का बटन दबाया था। हालांकि, अब यह भी रिकॉर्ड इंदौर के नाम पर दर्ज हो गया है।
कमलनाथ के गढ़ में सेंध
मध्य प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 29-0 से क्लीन स्वीप किया है। इसी के साथ अब राज्य पूरा भगवामय हो गया है। भाजपा ने अन्य किसी भी पार्टी को खाता खोलने का मौका तक नहीं दिया। कांग्रेस के कद्दावर नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बेटे और छिंदवाड़ा सीट से मौजूदा सांसद नकुल नाथ भी अपनी सीट नहीं बचा पाए। उन्हें भाजपा की जिला इकाई के अध्यक्ष विवेक बंटी साहू ने 1 लाख 13 हजार 618 वोटों के अंतर से हरा दिया। साहू को 6,44,738 मत मिले, जबकि नकुलनाथ को 5,31,120 मत मिले।
छिंदवाड़ा से 9 बार लोकसभा पहुंचे कमलनाथ
कांग्रेस से छिंदवाड़ा सीट छीनकर भाजपा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मध्य प्रदेश में वह एकमात्र सीट देने का अपना वादा पूरा किया है, जिसे वह 2019 में नहीं जीत पाई थी। भाजपा ने 2019 के लोकसभा चुनाव में 29 में से 28 सीट जीती थीं और तब से पार्टी की नजरें कमल नाथ के परिवार से छिंदवाड़ा सीट छीनने पर टिकी थीं। कमल नाथ छिंदवाड़ा से नौ बार जीते, जबकि उनकी पत्नी अलका नाथ ने एक बार और उनके पुत्र नकुल नाथ ने भी 2019 में एक बार यहां से जीत दर्ज की।
‘400 पार’ का नारा फेल, 300 का आंकड़ा नहीं छुआ
गौरतलब है कि इस चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 400 पार का नारा दिया था लेकिन पार्टी ने अकेले के दम पर बहुमत का आंकड़ा भी नहीं छुआ है। वहीं, इंडिया गठबंधन को 300 का आंकड़ा भी पार करना मुश्किल है। ऐसे में अब भाजपा को गठबंधन की सरकार बनानी पड़ेगी। वहीं, इंडिया गठबंधन भी जनता दल (जेडीयू) नीतीश कुमार और तेलगु देशम पार्टी (टीडीपी) प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू को संपर्क करने में लगा हुआ है।
