भोपाल गैस त्रासदी के 41 साल बाद यूनियन कार्बाइड का होगा कायाकल्प, लगेंगे 1.5 लाख पेड़; बनेगा मिनी फॉरेस्ट
Union Carbide Mini Forest Development Plan: यूनियन कार्बाइड परिसर को 41 साल पुरानी गैस त्रासदी के बाद अब नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा। इसे मिनी फॉरेस्ट और स्मारक के रूप में तैयार किया जाएगा।
- Written By: सजल रघुवंशी
यूनियन कार्बाइड (सोर्स- सोशल मीडिया)
Union Carbide Plant Revitalization: यूनियन कार्बाइड परिसर को 41 साल पुरानी गैस त्रासदी के बाद अब नए स्वरूप में विकसित किया जाएगा। भोपाल में स्थित 67 एकड़ क्षेत्र में करीब डेढ़ लाख पौधे लगाकर इसे मिनी फॉरेस्ट और स्मारक के रूप में तैयार किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस पहल की घोषणा करते हुए कहा कि यह परियोजना पर्यावरण सुधार, हरियाली बढ़ाने और पर्यटन को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाएगी। विकसित होने के बाद यह परिसर शहर को नई पहचान देने के साथ स्वच्छ वातावरण और हरित क्षेत्र के रूप में भी जाना जाएगा।
शुद्ध ऑक्सीजन के साथ होगा पार्यावरण संतुलन मजबूत
यूनियन कार्बाइड परिसर में लगाए जाने वाले 1.5 लाख पेड़ भोपाल को शुद्ध ऑक्सीजन देने के साथ पर्यावरण संतुलन मजबूत करेंगे। विशेष प्रजाति के पौधे मिट्टी और भूजल में मौजूद जहरीले तत्वों को सोखने में मदद करेंगे, जबकि 67 एकड़ की हरियाली शहर के बढ़ते तापमान को नियंत्रित करेगी। परिसर में मौजूद शेष कचरे का वैज्ञानिक तरीके से उपचार किया जाएगा। यह स्थान अब गैस त्रासदी की पीड़ा के बजाय शांति, पर्यावरण संरक्षण और नई उम्मीद का प्रतीक बनेगा। साथ ही इसे ईको-टूरिज्म और रिसर्च सेंटर के रूप में विकसित कर भोपाल की पहचान ‘त्रासदी के शहर’ से बदलकर ‘पीस मेमोरियल’ के रूप में स्थापित करने की तैयारी है।
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336 मीट्रिक टन जहरीला कचरा होगा साफ
राजधानी भोपाल की सबसे प्रदूषित और जहरीली मानी जाने वाली भूमि पर यह परियोजना पर्यावरणविदों की निगरानी और मार्गदर्शन में विकसित की जा रही है। परिसर से 336 मीट्रिक टन जहरीला कचरा हटाने के बाद अब बचे हुए अपशिष्ट की वैज्ञानिक जांच की जाएगी। माना जा रहा है कि इस पहल से शहर में प्रदूषण के एक बड़े स्रोत को नियंत्रित करने में मदद मिलेगी और पर्यावरण सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिलेंगे।
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भोपाल को मिलने जा रही है नई पहचान
सामाजिक संगठनों का मानना है कि यूनियन कार्बाइड परिसर को ‘पीस मेमोरियल’ के रूप में विकसित किया जाना चाहिए, जिससे मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल की पहचान त्रासदी नहीं बल्कि शांति और पर्यावरण संरक्षण के प्रतीक शहर के रूप में बने। पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार परिसर का भूजल अभी भी प्रभावित है। ऐसे में वैज्ञानिक परीक्षण, जहरीले मलबे की जांच और विशेष पौधों के जरिए जमीन के प्रदूषण को कम करने की दिशा में काम जरूरी है।
