लोकायुक्त पर RTI लागू होगा या नहीं इस पर फैसला सुरक्षित, SC ने सरकार से पूछा किस कानून के तहत छूट दी?
Supreme Court Order Reserved: मप्र लोकायुक्त को RTI के दायरे से बाहर रखने के मामले में सुप्रीम कोर्ट में फैसला सुरक्षित रख लिया है। SC ने सरकार से सवाल पूछा है कि किस कानून के तहत छूट दी गई थी।
- Written By: प्रीतेश जैन
सुप्रीम कोर्ट (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
MP Lokayukt RTI Case: मध्य प्रदेश लोकायुक्त को सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम 2005 से बाहर रखने संबंधी राज्य सरकार की 2011 की अधिसूचना की वैधानिकता पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई पूरी हो गई है। जस्टिस जे.के. महेश्वरी और जस्टिस अतुल एस. चंदुरकर की पीठ ने सुनवाई के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। मामले में मध्य प्रदेश सरकार की ओर से महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने पक्ष रखा।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से कड़े सवाल पूछे। कोर्ट ने पूछा कि आखिर किस कानूनी आधार पर लोकायुक्त को RTI से छूट दी गई, जबकि कानून की धारा 24(4) के तहत छूट केवल खुफिया और सुरक्षा संगठनों को ही दी जा सकती है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि राज्य सरकारें केवल उन्हीं संस्थाओं को छूट दे सकती हैं जो इंटेलिजेंस और सिक्योरिटी ऑर्गनाइजेशन के दायरे में आती हैं।
HC के आदेश को SC में चुनौती
गौरतलब है कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने 20 दिसंबर 2021 को कामता प्रसाद के एक मामले में लोकायुक्त संगठन को RTI के तहत जानकारी देने से इनकार करने पर आदेश जारी किया था और 5 हजार रुपए का जुर्माना लगाते हुए 30 दिन के भीतर जानकारी देने को कहा था। इसी आदेश के खिलाफ लोकायुक्त संगठन ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी।
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SPE और EOW को RTI के दायरे से बाहर किया
मध्य प्रदेश सरकार ने अगस्त 2011 में अधिसूचना जारी कर लोकायुक्त की विशेष पुलिस स्थापना (SPE) और आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) को RTI के दायरे से बाहर कर दिया था। सरकार का तर्क था कि इससे शिकायतकर्ताओं और गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।
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अन्य राज्यों में स्थिति अलग
हालांकि अन्य राज्यों में स्थिति अलग है। उत्तर प्रदेश में हाईकोर्ट ने RTI छूट वाली अधिसूचना रद्द कर दी थी, जिसके बाद वहां लोकायुक्त में RTI लागू है। इसी तरह कर्नाटक लोकायुक्त, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, महाराष्ट्र और राजस्थान में भी पारदर्शिता के तहत लोक सूचना अधिकारी नियुक्त हैं और कई जानकारियां सार्वजनिक की जाती हैं।
