MP News: भोपाल के चौराहों पर बजने वाले ट्रैफिक लाउडस्पीकरों पर NGT का डंडा, पुलिस को जारी हुए कड़े निर्देश
Bhopal News: भोपाल में ट्रैफिक पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम से बढ़ते ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ NGT ने कड़ा रुख अपनाया है। बता दें कि, 4 सप्ताह में विस्तृत विधिक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
- Written By: सजल रघुवंशी
एनजीटी (सोर्स- सोशल मीडिया)
NGT Central Zone Bench Bhopal Traffic Noise Pollution: राजधानी में ट्रैफिक पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम से बढ़ते ध्वनि प्रदूषण का मामला अब नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) पहुंच गया है। पर्यावरणविद् राशिद नूर की याचिका पर एनजीटी ने प्रशासन, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को आवश्यक निर्देश जारी किए हैं। मामले की अगली सुनवाई 17 अगस्त को निर्धारित की गई है।
एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच ने संबंधित विभागों से जवाब तलब किया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हर्षवर्धन तिवारी ने पक्ष रखा। सुनवाई में न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी शामिल रहे।
जानें क्या है पूरा मामला
याचिका में कहा गया है कि भोपाल में स्मार्ट सिटी परियोजना और ट्रैफिक पुलिस द्वारा कई चौराहों एवं प्रमुख सड़कों पर पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम लगाए गए हैं। इन सिस्टमों के माध्यम से पूरे दिन तेज आवाज में ट्रैफिक संबंधी संदेश, चेतावनियां और निर्देश प्रसारित किए जाते हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि इन अनाउंसमेंट सिस्टम की ध्वनि अत्यधिक तेज होने के कारण आम लोगों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि इससे ध्वनि प्रदूषण बढ़ रहा है, जो लोगों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
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कई स्थानों पर लगेगा पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम
याचिकाकर्ता का आरोप है कि कई स्थानों पर यह पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम अस्पतालों, स्कूलों, अदालतों और रिहायशी क्षेत्रों के आसपास भी संचालित किए जा रहे हैं, जबकि नियमों के तहत इन क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण पर कड़ी पाबंदी रहती है। इसे पर्यावरणीय कानूनों और ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों का उल्लंघन बताया गया है।
एनजीटी ने दिए अधिकारियों को कड़े निर्देश
नेशनल ग्रीन ट्रीब्यूनल ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि बिना अनुमति संचालित हो रहे या निर्धारित डेसिबल सीमा से अधिक ध्वनि करने वाले सभी पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम को तत्काल बंद किया जाए या उनकी आवाज नियंत्रित की जाए। एनजीटी ने मामले में सभी संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।
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साथ ही कलेक्टर और पुलिस कमिश्नर को ध्वनि प्रदूषण रोकने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को चार सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।
