MP NEWS: एमएसएमई विभाग में तबादलों और प्रभार व्यवस्था पर बवाल, जूनियर अधिकारियों को सौंपे गए महाप्रबंधक पद
MSME Transfer Controversy: मध्यप्रदेश MSME विभाग में जूनियर अधिकारियों को महाप्रबंधक का प्रभार देने पर विवाद बढ़ गया है। वरिष्ठ अधिकारियों को नजरअंदाज किए जाने से विभाग में नाराजगी है।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: प्रीतेश जैन
वल्लभ भवन (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
MP MSME Department News: मध्यप्रदेश के एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) विभाग में तबादलों और प्रभारी नियुक्तियों को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। विभाग द्वारा 15 और 16 जून को जारी किए गए आदेशों के बाद कर्मचारियों और अधिकारियों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। आरोप है कि वरिष्ठता और नियमित सेवा अधिकारियों को नजरअंदाज कर जूनियर कर्मचारियों को जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र (DIC) के महाप्रबंधक जैसे महत्वपूर्ण पदों का प्रभार सौंप दिया गया है।
विवाद की सबसे बड़ी वजह विभाग में लागू की गई “चार्ज के ऊपर चार्ज” व्यवस्था को बताया जा रहा है। विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिन अधिकारियों का मूल पद सहायक प्रबंधक है और जो पहले से प्रभारी प्रबंधक के रूप में कार्य कर रहे हैं, उन्हें अब महाप्रबंधक (GM) का अतिरिक्त प्रभार भी दे दिया गया है। इसे लेकर विभाग के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है।
इन अधिकारियों को मिला महाप्रबंधनक का प्रभार
जिन अधिकारियों को महाप्रबंधक का प्रभार दिया गया है, उनमें सुबोध कुमार श्रीवास्तव (मंडीदीप), जेपी तिवारी (रीवा), शिवशंकर सिंह (निवाड़ी), सुरेश कुमार गोस्वामी (भिंड), राममूर्ति खरे (अनूपपुर), अजय तिवारी (शिवपुरी) और बीएल अहिरवार (दमोह) के नाम शामिल हैं।
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सेवा नियमों पर सवाल
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि एमपीपीएससी के माध्यम से चयनित वर्ष 2016, 2017 और 2019 बैच के 60 से अधिक नियमित वर्ग-2 राजपत्रित अधिकारी विभाग में पहले से मौजूद हैं। इसके बावजूद प्रभारी व्यवस्था के जरिए जूनियर अधिकारियों को वरिष्ठ पदों की जिम्मेदारी देना प्रशासनिक व्यवस्था और सेवा नियमों पर सवाल खड़े करता है।
वर्ग-3 श्रेणी वाले अधिकारियों के नीचे काम करेंगे वर्ग-2 राजपत्रित अधिकारी
विवाद का एक और बड़ा पहलू गोपनीय चरित्रावली (CR) को लेकर सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक अब कई जिलों में वर्ग-2 राजपत्रित अधिकारी ऐसे अधिकारियों के अधीन काम करेंगे, जो मूल रूप से वर्ग-3 सेवा श्रेणी से आते हैं। ऐसे में जूनियर अधिकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों की सीआर लिखेंगे, जिसे सेवा नियमों के विपरीत और प्रशासनिक दृष्टि से अनुचित माना जा रहा है।
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लंबे समय से लंबित है पदोन्नति प्रक्रिया
अधिकारियों का यह भी आरोप है कि लंबे समय से पदोन्नति की प्रक्रिया लंबित पड़ी है, लेकिन विभाग नियमित प्रमोशन के बजाय प्रभारी व्यवस्था के सहारे मनमाने फैसले ले रहा है। इससे विभागीय पदक्रम और अधिकारियों का मनोबल प्रभावित हो रहा है। फिलहाल इस पूरे मामले को लेकर विभागीय स्तर पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन अंदरखाने असंतोष और विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है।
