MP कांग्रेस में घमासान: खुलकर सामने आई गुटबाजी और अंतर्कलह, इन नेताओं पर गिर सकती है कार्रवाई की गाज
MP Political News : मीनाक्षी का नामांकन रद्द होने के बाद MP कांग्रेस में अंदरूनी घमासान तेज हो गया है। सोशल मीडिया पर असंतोष जताने वाले नेताओं पर अनुशासनात्मक कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: प्रीतेश जैन
कांग्रेस मीटिंग, फाइल फोटो (सोर्स- नवभारत)
MP Congress Internal Conflict: राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर लंबे समय से चली आ रही गुटबाजी और संगठनात्मक कमजोरियों को एक बार फिर सामने ला दिया है। सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस हाईकमान प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली से नाराज बताया जा रहा है, जबकि प्रदेश कांग्रेस कमेटी अब सार्वजनिक रूप से असंतोष जताने वाले नेताओं और पदाधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की तैयारी में है।
नामांकन खारिज होने के बाद कांग्रेस के कई नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की। प्रदेश नेतृत्व की कार्यशैली और निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए किए गए पोस्ट अब संगठन के लिए नई चुनौती बन गए हैं। सूत्रों के मुताबिक, प्रदेश कांग्रेस कमेटी ऐसे नेताओं और पदाधिकारियों की सूची तैयार कर रही है जिन्होंने सार्वजनिक मंचों पर पार्टी लाइन से अलग जाकर बयानबाजी की है। आने वाले दिनों में इनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा सकती है।
समन्वय की कमी पर उठे सवाल
राज्यसभा नामांकन विवाद ने प्रदेश कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के बीच समन्वय की कमी को भी उजागर कर दिया है। पार्टी के भीतर चर्चा है कि उम्मीदवार के नाम की घोषणा समय रहते कर दी गई थी, लेकिन नामांकन प्रक्रिया से जुड़े कानूनी और तकनीकी पहलुओं पर पर्याप्त सावधानी नहीं बरती गई। परिणामस्वरूप तकनीकी कारणों से नामांकन रद्द हो गया और कांग्रेस को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक अवसर गंवाना पड़ा।
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हाईकमान ने मांगी विस्तृत रिपोर्ट
सूत्रों के अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व इस पूरे मामले को गंभीरता से ले रहा है। दिल्ली में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने प्रदेश इकाई से पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट तलब की है। बताया जा रहा है कि समीक्षा के दौरान प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, संगठन प्रभारी हरीश चौधरी और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कई वरिष्ठ नेताओं की भूमिका पर भी चर्चा हो सकती है। हाईकमान यह जानना चाहता है कि नामांकन प्रक्रिया में चूक कैसे हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन था?
संगठन में बदलाव की अटकलें तेज
नामांकन विवाद के बाद मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक फेरबदल और जवाबदेही तय किए जाने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस प्रकरण का असर केवल राज्यसभा चुनाव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसका प्रभाव प्रदेश कांग्रेस की आगामी रणनीति और नेतृत्व संरचना पर भी पड़ सकता है।
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चुनाव आयोग और भाजपा के खिलाफ आंदोलन कर रही कांग्रेस
फिलहाल पार्टी एक ओर इस मुद्दे को लेकर भाजपा और निर्वाचन आयोग के खिलाफ आंदोलन चला रही है, वहीं दूसरी ओर संगठन के भीतर उठे असंतोष को नियंत्रित करने की चुनौती का भी सामना कर रही है। आने वाले दिनों में हाईकमान की समीक्षा और संभावित कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।
