MP: UCC लागू करने की तैयारी, गुजरात मॉडल पर आधारित होगा कानून, CM मोहन यादव के सामने ड्राफ्ट का प्रेजेंटेशन
Mohan Yadav UCC : MP में UCC लागू करने की तैयारी तेज हो गई है। गुजरात मॉडल पर आधारित ड्राफ्ट का CM के सामने प्रेजेंटेशन हुआ। विवाह पंजीकरण, भरण-पोषण और आदिवासियों से जुड़े विशेष प्रावधान शामिल हैं।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: प्रीतेश जैन
UCC (फोटो सोर्स- सोशल मीडिया)
Madhya Pradesh UCC Draft: मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने की दिशा में सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। राज्य सरकार की ओर से तैयार किया जा रहा UCC का ड्राफ्ट अब लगभग अंतिम चरण में पहुंच चुका है। हाल ही में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के समक्ष ड्राफ्ट का विस्तृत प्रेजेंटेशन दिया गया, जिसमें मिले सुझावों के आधार पर अंतिम संशोधन किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य पूरे राज्य में विवाह, तलाक, भरण-पोषण और उत्तराधिकार जैसे नागरिक मामलों के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।
सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश का UCC ड्राफ्ट काफी हद तक गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड-2026 के मॉडल पर आधारित है। बताया जा रहा है कि ड्राफ्ट के करीब 90 प्रतिशत प्रावधान गुजरात मॉडल से लिए गए हैं। माना जा रहा है कि इस मॉडल को अपनाने से कानूनी प्रक्रियाएं सरल होंगी और केंद्र सरकार की मंजूरी मिलने में भी सहूलियत रहेगी।
धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों पर भी लागू होगा UCC
ड्राफ्ट में आदिवासी समुदाय की पारंपरिक मान्यताओं और धार्मिक स्वतंत्रता का विशेष ध्यान रखा गया है। जो आदिवासी अपनी पारंपरिक जनजातीय रीति-रिवाजों और आस्थाओं का पालन करते हैं, उन्हें UCC के दायरे से बाहर रखने का प्रस्ताव है। वहीं, धर्म परिवर्तन कर चुके लोगों पर UCC के प्रावधान लागू होंगे।
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धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि UCC लागू होने से किसी भी समुदाय की धार्मिक परंपराओं या विवाह की धार्मिक विधियों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा। हिंदू विवाह, मुस्लिम निकाह, सिख आनंद कारज और ईसाई चर्च मैरिज जैसी धार्मिक प्रक्रियाएं पहले की तरह जारी रहेंगी। हालांकि, विवाह के बाद कानूनी अधिकार, जिम्मेदारियां और सुरक्षा से जुड़े नियम सभी नागरिकों के लिए समान होंगे।
शादी का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य
ड्राफ्ट के अनुसार, UCC लागू होने के बाद विवाह का पंजीकरण अनिवार्य होगा। शादी के 60 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार के पास पंजीकरण कराना होगा। यह नियम उन विवाहों पर भी लागू होगा, जो राज्य के बाहर संपन्न हुए हों, यदि पति या पत्नी में से कोई एक मध्य प्रदेश का निवासी है। इसके अलावा पुराने विवाह और तलाक के मामलों को भी डिजिटल रिकॉर्ड में शामिल किया जाएगा।
वसीयत से जुड़े मामलों में भी नियम स्पष्ट
भरण-पोषण से जुड़े प्रावधानों में भोजन और आवास के साथ शिक्षा, कपड़े और चिकित्सा खर्च को भी शामिल किया गया है। बच्चों की कस्टडी के लिए एक समान कानूनी व्यवस्था का प्रस्ताव है। वहीं, उत्तराधिकार और वसीयत से जुड़े मामलों में भी स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। गर्भस्थ शिशु के अधिकारों को मान्यता देने, विवादित संपत्ति की सुरक्षा के लिए कोर्ट द्वारा क्यूरेटर नियुक्त करने और दबाव या धोखाधड़ी से बनाई गई वसीयत को अमान्य घोषित करने जैसे प्रावधान भी ड्राफ्ट में शामिल किए गए हैं।
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डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करेगी सरकार
सरकार विवाह और तलाक का केंद्रीकृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करेगी। रजिस्ट्रार जनरल और रजिस्ट्रार की नियुक्ति की जाएगी तथा आवेदन खारिज होने की स्थिति में अपील का अधिकार भी नागरिकों को मिलेगा। गलत जानकारी देने या रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करने पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान प्रस्तावित किया गया है।
