स्लॉटर हाउस केस के आरोपियों को मिला राजनीतिक संरक्षण, जनता को किया गुमराह: अमित शर्मा
Bhopal Slaughter House Case: अमित शर्मा ने भोपाल स्लॉटर हाउस केस की जांच पर उठाए सवाल, दोषियों को राजनीतिक संरक्षण देने का आरोप, मुख्यमंत्री से उच्च स्तरीय जांच की मांग
- Written By: प्रीतेश जैन
अमित शर्मा, महासचिव, MP कांग्रेस कमेटी (सोर्स- नवभारत)
Bhopal Slaughter House Case: मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव अमित शर्मा ने भोपाल स्लॉटर हाउस केस में दोषियों को राजनीतिक संरक्षण देने और जांच कमेटी द्वारा केवल खानापूर्ति करने का आरोप लगाया है। शर्मा ने मामले में गिरफ्तार असलम चमड़ा को जमानत मिलने पर भी सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री मोहन यादव से पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा ‘भोपाल स्लॉटर हाउस का मामला केवल एक प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था, सनातन परंपराओं, धार्मिक भावनाओं तथा शासन-प्रशासन की जवाबदेही से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय है।’
भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान अमित शर्मा ने कहा ‘पिछले कई महीनों से भोपाल के जहांगीराबाद स्थित मॉडर्न स्लॉटर हाउस को लेकर गंभीर शिकायतें सामने आ रही हैं। इस मामले में असलम चमड़ा एवं उसके ड्राइवर की गिरफ्तारी हुई, बाद में उन्हें जमानत भी मिल गई, लेकिन प्रश्न यह है कि क्या इतना बड़ा अवैध कारोबार केवल एक व्यक्ति के भरोसे संचालित हो सकता है? भोपाल की महापौर, एमआईसी सदस्य और संबंधित अधिकारियों ने लगातार यह कहा कि उन्हें मामले की जानकारी नहीं थी, लेकिन आज प्रस्तुत दस्तावेज स्पष्ट करते हैं कि यह दावा पूरी तरह असत्य है।’
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दस्तावेज दिखाते हुए गिनाई अनियमितताएं
शर्मा ने दस्तावेज दिखाते हुए कहा ’24 अक्टूबर 2025 की MIC बैठक में प्रस्ताव क्रमांक 6 के अंतर्गत जहांगीराबाद स्थित मॉडर्न स्लॉटर हाउस के काम को पूरा करने के लिए 8 अक्टूबर 2025 तक मात्र 6 माह की अवधि विस्तार का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था, लेकिन बाद में उसी प्रक्रिया में संशोधन कर बिना पेनल्टी समयावधि बढ़ाते हुए संचालन एवं संधारण का अनुबंध 20 साल के लिए दे दिया गया। यह गंभीर अनियमितता है।’
भ्रष्टाचार और पद का दुरुपयोग किया गया
उन्होंने आरोप लगाया ‘करोड़ों रुपए की पेनल्टी, जो संबंधित पक्ष पर लगाई गई थी, उसे भी माफ कर दिया गया। पहले दंड लगाया गया और बाद में मिलीभगत से उसे समाप्त कर दिया गया। यह सीधे-सीधे भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का मामला है। जिन लोगों ने सार्वजनिक रूप से कहा कि उन्हें जानकारी नहीं थी, उनके हस्ताक्षर दस्तावेजों पर मौजूद हैं। इनमें महापौर मालती राय सहित कई MIC सदस्यों के हस्ताक्षर दर्ज हैं। इससे स्पष्ट है कि जनता को गुमराह किया गया।’
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उच्च स्तरीय जांच कराएं CM मोहन
कांग्रेस कमेटी के महासचिव ने कहा ‘पूरे प्रकरण में राज्य सरकार द्वारा गठित SIT केवल खानापूर्ति साबित हुई है। मूल दस्तावेजों को जांच से दूर रखा गया और पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया गया। यदि सरकार वास्तव में गौ संरक्षण, सनातन संस्कृति और धार्मिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्ध है तो फिर इस मामले पर भाजपा के बड़े नेता और स्वयंभू धर्म रक्षक मौन क्यों हैं? मुख्यमंत्री मोहन यादव से मांग है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय न्यायिक जांच कराकर सभी दोषी अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और संरक्षण देने वालों पर कठोर कार्रवाई की जाए और जनता के सामने सत्य रखा जाए।’
भ्रष्टाचारियों को बेनकाब करेगी कांग्रेस
शर्मा के मुताबिक असलम चमड़ा को जमानत मिलना यह स्पष्ट करता है कि मामला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे बड़े संरक्षणकर्ताओं की भूमिका है, जिनकी पहचान उजागर होना आवश्यक है।कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे को जनता की आवाज बनाकर लगातार उठाएगी और धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ तथा भ्रष्टाचार करने वालों को बेनकाब करेगी।
