जहां हर मिनट उफनता था 25 हजार लीटर पानी, जानें कैसे बनी वो टनल; CM मोहन यादव ने करीब से देखा ड्रीम प्रोजेक्ट
Sleemanabad Tunnel Project: विंध्य-महाकौशल के लिए अमृतधारा बनेगी ₹1610 करोड़ की स्लीमनाबाद टनल, 96% काम पूरा, CM मोहन यादव ने किया ऐतिहासिक परियोजना का निरीक्षण।
- Reported By: सुधीर दंडोतिया | Edited By: सजल रघुवंशी
मध्य प्रदेश स्लीमनाबाद टनल प्रोजेक्ट (सोर्स- सोशल मीडिया)
CM Mohan Yadav Inspects Sleemanabad Tunnel Project: मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी स्लीमनाबाद टनल परियोजना अब अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 17 जुलाई को कटनी जिले में परियोजना का निरीक्षण करते हुए इसे प्रदेश के विकास की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
करीब 12 किलोमीटर लंबी यह टनल विंध्य और महाकौशल क्षेत्र के लिए किसी इंजीनियरिंग चमत्कार से कम नहीं मानी जा रही है। इसके शुरू होने के बाद जबलपुर, कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना के लगभग 1450 गांवों की 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि को स्थायी सिंचाई सुविधा मिलेगी। सरकार का दावा है कि इससे क्षेत्र की कृषि, अर्थव्यवस्था और किसानों की आय में बड़ा बदलाव आएगा।
18 साल के लंबे संघर्ष के बाद तैयार हुई ऐतिहासिक परियोजना
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि इस परियोजना का अनुबंध वर्ष 2008 में हुआ था और शुरुआती लागत 799 करोड़ रुपये तय की गई थी। निर्माण के दौरान कठिन भौगोलिक परिस्थितियों, जल रिसाव और तकनीकी चुनौतियों के कारण लागत बढ़कर 1610.47 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। वर्ष 2015 तक टनल की खुदाई धीमी रही, लेकिन 2016 में जर्मनी से लाई गई अत्याधुनिक मशीन के जरिए काम में तेजी आई। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2023 में नई सरकार बनने के बाद ठेकेदार के पीछे हटने और मशीनों के पुराने होने जैसी चुनौतियां भी सामने आईं, लेकिन सरकार ने परियोजना को हर हाल में पूरा करने का निर्णय लिया। वर्तमान में परियोजना का 96.66 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और मुख्य टनल व ओपन कट नहर का निर्माण शत-प्रतिशत पूरा हो गया है।
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विंध्य क्षेत्र के लिए बनेगी अमृतधारा, लाखों किसानों को मिलेगा लाभ
करीब 11.952 किलोमीटर लंबी और 10.14 मीटर व्यास वाली यह टनल नर्मदा नदी के पानी को गुरुत्वाकर्षण के आधार पर सोन नदी बेसिन तक पहुंचाएगी। इसके लिए किसी भारी पंप या अतिरिक्त बिजली की आवश्यकता नहीं होगी। परियोजना पूरी होने के बाद कटनी, मैहर, सतना, रीवा और पन्ना सहित छह जिलों की लगभग 2.45 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। सरकार के अनुसार आगामी तीन महीनों में ही रबी सीजन के लिए करीब एक लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई का पानी उपलब्ध कराया जाएगा। इसके अलावा पेयजल आपूर्ति और कुछ स्थानों पर जलविद्युत उत्पादन की भी संभावनाएं विकसित होंगी।
कठिन चुनौतियों के बीच बना इंजीनियरिंग का अद्भुत नमूना
स्लीमनाबाद टनल का निर्माण विंध्य पर्वतमाला की कठोर चट्टानों के बीच किया गया, जहां मार्बल, लाइमस्टोन, डोलोमाइट और विशाल भूमिगत गुफाओं जैसी प्राकृतिक बाधाओं का सामना करना पड़ा। निर्माण के दौरान टनल के भीतर प्रति मिनट करीब 25 हजार लीटर पानी का रिसाव हो रहा था और कई स्थानों पर मिट्टी धंसने का खतरा बना हुआ था। अमेरिकी मशीन के क्षतिग्रस्त होने के बाद जर्मनी की आधुनिक हेरेनकनेक्ट मशीन और विशेष ग्राउटिंग तकनीक का उपयोग कर निर्माण पूरा किया गया।
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यह टनल घनी आबादी, रेलवे ट्रैक और राष्ट्रीय राजमार्ग के नीचे से गुजरती है और इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि भीषण भूकंप की स्थिति में भी यह लगभग 100 वर्षों तक सुरक्षित रह सके। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक इस परियोजना के माध्यम से 1.85 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में सिंचाई व्यवस्था पूरी तरह विकसित करना है, जिससे विंध्य और महाकौशल क्षेत्र में कृषि समृद्धि का नया अध्याय शुरू होगा।
