आज करें माता चंद्रघंटा का पूजन (सोशल मीडिया)
सीमा कुमारी
नवभारत लाइफस्टाइल डेस्क: आज गुरुवार, 11 अप्रैल 2024 को ‘चैत्र नवरात्रि’ (Chaitra Navratri 2024) महापर्व का तीसरा दिन है।नवरात्रि का तीसरा दिन मां चंद्रघंटा (Chandraghanta) की पूजा को समर्पित होता है। मां का यह स्वरूप अत्यंत तेजमयी और शक्ति स्वरूपा माना गया है। मां के मस्तक पर अर्द्धचंद्र के आकार का घंटा शोभित है इसलिए मां के इस रूप का नाम चंद्रघंटा पड़ा है।
देवी भागवत पुराण के अनुसार मां दुर्गा का यह रूप शांति और समृद्धि प्रदान करने वाला माना गया है। ऐसी मान्यता है कि चंद्रघंटा देवी की पूजा करने से आपके तेज और प्रताप में वृद्धि होती है और समाज में आपका प्रभाव बढ़ता है। देवी का यह रूप आत्मविश्वास में वृद्धि प्रदान करने वाला माना गया है। आइए
यहां जानिए मां दुर्गा के इस तीसरे रूप के बारे में सबकुछ-
मां चंद्रघंटा का स्वरूप अत्यंत सौम्यता एवं शांति से परिपूर्ण है। मां चंद्रघंटा और इनकी सवारी शेर दोनों का शरीर सोने की तरह चमकीला है। दसों हाथों में कमल और कमडंल के अलावा अस्त-शस्त्र है। माथे पर बना आधा चांद इनकी पहचान है। इस अर्ध चांद की वजह के इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। अपने वाहन सिंह पर सवार मां का यह स्वरूप युद्ध व दुष्टों का नाश करने के लिए तत्पर रहता है। चंद्रघंटा को स्वर की देवी भी कहा जाता है।
कैसे करें चंद्रघंटा की पूजा
नवरात्रि के तीसरे दिन मां चंद्रघंटा की पूजा के लिए खासकर लाल रंग के फूल चढ़ाएं। इसके साथ ही फल में लाल सेब चढ़ाएं। भोग चढ़ाने के दौरान और मंत्र पढ़ते वक्त मंदिर की घंटी जरूर बजाएं। क्योंकि मां चंद्रघंटा की पूजा में घंटे का बहुत महत्व है।
मान्यता है कि, घंटे की ध्वनि से मां चंद्रघंटा अपने भक्तों पर हमेशा अपनी कृपा बरसाती है। मां चंद्रघंटा को दूध और उससे बनी चीजों का भोग लगाएं और और इसी का दान भी करें। मां चंद्रघंटा को मखाने की खीर का भोग लगाना श्रेयस्कर माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से मां खुश होती हैं और सभी दुखों का नाश करती हैं।
मां चंद्रघंटा की पूजा का महत्व
इनकी आराधना से साधकों को चिरायु,आरोग्य, सुखी और संपन्न होने का वरदान प्राप्त होता हैं। मां चंद्रघंटा की कृपा से साधक के समस्त पाप और बाधाएं नष्ट हो जाती हैं। इनकी आराधना से प्राप्त होने वाला एक बहुत बड़ा सद्गुण यह भी है कि साधक में वीरता-निर्भयता के साथ ही सौम्यता और विनम्रता का भी विकास होता है। उसके मुख, नेत्र तथा सम्पूर्ण काया में कांति वृद्धि होती है एवं स्वर में दिव्य-अलौकिक माधुर्य का समावेश हो जाता है। क्रोधी, छोटी-छोटी बातों से विचलित हो जाने, तनाव लेने वाले और पित्त प्रकृति के लोग मां चंद्रघंटा की भक्ति करें।