

Humanitarian Heroes: हर साल 19 अगस्त को World Humanitarian Day मनाया जाता है। इसकी शुरुआत 19 अगस्त 2003 की उस दुखद घटना की याद में की गई थी, जब इराक के बगदाद स्थित कैनल होटल में संयुक्त राष्ट्र के परिसर पर बम हमला हुआ था। इस हमले में 22 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें संयुक्त राष्ट्र के इराक में तत्कालीन विशेष प्रतिनिधि सर्जियो विएरा डी मेलो भी शामिल थे।
इस घटना के पांच साल बाद, 2008 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 19 अगस्त को विश्व मानवता दिवस घोषित किया। इसका उद्देश्य संकट, युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित लोगों की मदद करने वाले मानवता के रक्षकों को सम्मान देना और उनकी सुरक्षा व गरिमा को दुनिया के सामने लाना है।
आइए जानते हैं मानवता के ऐसे ही कुछ हीरो के बारे में, जिन्होंने दुनिया भर के लिए मिसाल कायम की।
अयोध्या के साइकिल मैकेनिक मोहम्मद शरीफ को लोग प्यार से ‘शरीफ चाचा’ कहते हैं। बेटे की मौत के बाद उन्होंने लावारिस शवों के अंतिम संस्कार का काम शुरू किया। उन्होंने अलग-अलग धर्मों की परंपराओं के अनुसार हजारों लावारिस शवों का अंतिम संस्कार कराया। इसके पीछे उनका मकसद था, इंसान की पहचान उसकी मौत के बाद भी सम्मान से होनी चाहिए।
ब्राजील के सर्जियो विएरा डी मेलो संयुक्त राष्ट्र के जाने-माने मानवतावादी और राजनयिक थे। उन्होंने कंबोडिया, कोसोवो, पूर्वी तिमोर और इराक जैसे संघर्षग्रस्त क्षेत्रों में लोगों की मदद के लिए काम किया। 19 अगस्त 2003 को बगदाद में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय पर हुए बम हमले में उनकी मृत्यु हो गई। उनकी स्मृति में ही हर साल विश्व मानवता दिवस मनाया जाता है।
मदर टेरेसा ने कोलकाता में गरीब, बीमार, अनाथ और बेसहारा लोगों की सेवा में अपना पूरा जावन समर्पित कर दिया था। उन्होंने मिशनरीज ऑफ चैरिटी की स्थापना की, जिसने दुनिया के कई हिस्सों में जरूरतमंद लोगों तक सहायता पहुंचाई। उनके मानवीय कार्यों के लिए उन्हें 1979 में नोबेल पीस प्राइज से सम्मानित किया गया था।
कांगो के स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. डेनिस मुकवेगे ने युद्ध और संघर्ष के दौरान यौन हिंसा की शिकार महिलाओं के इलाज और पुनर्वास के लिए अपना जीवन समर्पित किया। उन्होंने पणजी हॉस्पिटल के जरिए हजारों महिलाओं को मेडिकल हेल्प और मानसिक-सामाजिक सहयोग दिलाने में अहम भूमिका निभाई। महिलाओं के अधिकारों और उनके सम्मान के लिए उनके संघर्ष को 2018 के नोबेल पीस प्राइज से भी सम्मानित किया गया।
द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान पोलैंड की सामाजिक कार्यकर्ता इरेना सेंडलर ने नाजी कब्जे वाले वारसा यहूदी बस्ती से करीब 2,500 यहूदी बच्चों को बाहर निकालने में मदद की। इतना ही नहीं बच्चों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाकर उनकी पहचान छिपाने की कोशिश की, ताकि उनकी जान बचाई जा सके। अपने जीवन को जोखिम में डालकर किया गया उनका यह काम मानव साहस और करुणा का असाधारण उदाहरण है।
पाकिस्तान के अब्दुल सत्तार ईधी ने बेहद साधारण जीवन जीते हुए जरूरतमंदों के लिए विशाल सामाजिक सेवा का नेटवर्क खड़ा किया। उनके नाम से जुड़ी ईधी फाउंडेशन ने एम्बुलेंस सेवा, अनाथालय, होम स्टे और अन्य मानवीय सहायता कार्यक्रमों के जरिए लाखों लोगों तक मदद पहुंचाई। उनके जीवन से यह संदेश मिलता है कि मानव सेवा के लिए बड़े रिसोर्सेज नहीं बल्कि मजबूत इच्छा शक्ति जरूरी होती है।
ऑस्ट्रेलिया के निक वुजिसिक जन्म से ही हाथ-पैरों के बिना हैं। शारीरिक चुनौतियों के बावजूद उन्होंने दुनिया भर में प्रेरणादायक भाषण देकर लोगों को मुश्किल परिस्थितियों से लड़ने और जीवन में उम्मीद न हारने का संदेश दिया। उनका संगठन लाइफ विदाउट लम्बस भी लोगों को प्रेरित और सशक्त बनाने के लिए काम करता है।