

सीमा कुमारी
नवभारत लाइफस्टाइल डेस्क: मौजूदा समय में महिलाएं किसी भी मामले में पुरुषों से कम नहीं हैं। घर हो या बाहर महिलाएं (Women's Rights) आज पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाएं खड़ी हैं। ऐसा कोई क्षेत्र नहीं जहां महिलाएं अपना योगदान न दे रही हों। घर हो या बाहर महिलाएं अपनी जिम्मेदारियों को बखूबी निभा रही हैं।
लेकिन, ऐसी कई वजहें भी हैं, जिनकी वजह से उन्हें पुरुषों की तुलना ज्यादा समस्याओं का सामना करना पड़ता है। भारत की ही बात करें तो, यहां हर मिनट एक महिला अपराध का शिकार होती है। फिर चाहे वो अपने घर पर हो, ऑफिस या फिर पब्लिक प्लेस पर, उनकी सुरक्षा पर हमेशा सवाल खड़ा होता है।
'अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस' (International Women's Day) 8 मार्च को है। इस अवसर पर आइए जानें घर से लेकर ऑफिस में
1- घरेलू हिंसा के खिलाफ अधिकार
प्राप्त जानकारी के अनुसार, आपको बता दें कि अगर आप किसी की पत्नी है और आपका पति आप पर घरेलू हिंसा करता है तो आपके पास उसके खिलाफ पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज करने का हक है।
भारतीय संविधान की धारा 498 के अनुसार पत्नी, महिला जो लिव-इन पार्टनर के साथ रहती है या किसी के भी घर में रहने वाली महिला जिसे घरेलू हिंसा झेलनी पड़ रही है उसे यह कानूनी रूप से अधिकार मिलता है कि वह इस हिंसा के खिलाफ अपनी आवाज उठाए और केस फाइल करे। ऐसा करने से आरोपी को भारी जुर्माना भरना पड़ता है या उसे 3 साल की कारावास भी होती है।
2 -समान वेतन का अधिकार
समान पारिश्रमिक अधिनियम के अनुसार, अगर बात वेतन या मजदूरी की हो तो लिंग के आधार पर किसी के साथ भी भेदभाव नहीं किया जा सकता है।
3 -गर्भपात कराने का अधिकार
वैसे तो, गर्भपात कराना अपराध है पर गर्भ की वजह से अगर महिला को जान का खतरा है तो, वह गर्भपात करा सकती है।
4- दहेज लेने पर मिलेगा दंड
आपको बता दें कि, अगर विवाह के समय या उसके बाद लड़के के परिवार वाले या वह लड़का खुद ही दहेज की मांग करता है तो लड़की के परिवार वालों को मजबूरी में दहेज देने की जरूरत नहीं है।
आप इसके खिलाफ दहेज प्रतिषेध अधिनियम के अनुसार शिकायत दर्ज कर सकती हैं। इससे परिवार वालों को जेल होने के साथ-साथ भारी जुर्माना भी चुकाना पड़ता है।
5 -अगर कार्यस्थल पर हो रहा है उत्पीड़न
आपको बता दें कि अगर किसी महिला का उसके ऑफिस में या किसी भी कार्यस्थल पर शारीरिक उत्पीड़न या यौन उत्पीड़न किया जाता है तो उत्पीड़न करने वाले आरोपी के खिलाफ महिला शिकायत दर्ज कर सकती है।
यौन उत्पीड़न अधिनियम के तहत महिलाओं को कार्यस्थल पर होने वाली शारीरिक उत्पीड़न या यौन उत्पीड़न से सुरक्षा मिलती है।
6- नाम न छापने का अधिकार
यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को नाम न छापने देने का अधिकार है। अपनी गोपनीयता की रक्षा करने के लिए यौन उत्पीड़न की शिकार हुई महिला अकेले अपना बयान किसी महिला पुलिस अधिकारी की मौजूदगी में या फिर जिलाधिकारी के सामने दर्ज करा सकती है।
7- मातृत्व संबंधी लाभ के लिए अधिकार
मातृत्व लाभ कामकाजी महिलाओं के लिए सिर्फ सुविधा नहीं, बल्कि ये उनका अधिकार है। मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत एक नई मां के प्रसव के बाद 6 महीने तक महिला के वेतन में कोई कटौती नहीं की जाती और वो फिर से काम शुरू कर सकती है।
8- रात में गिरफ्तार न होने का अधिकार
एक महिला को सूरज डूबने के बाद और सूरज उगने से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता, किसी खास मामले में एक प्रथम श्रेणी के मजिस्ट्रेट के आदेश पर ही ये संभव है।
9- गरिमा और शालीनता के लिए अधिकार
किसी मामले में अगर आरोपी एक महिला है तो, उसपर की जाने वाली कोई भी चिकित्सा जांच प्रक्रिया किसी महिला द्वारा या किसी दूसरी महिला की उपस्थिति में ही की जानी चाहिए।
10 - संपत्ति पर अधिकार
हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत नए नियमों के आधार पर पुश्तैनी संपत्ति पर महिला और पुरुष दोनों का बराबर हक है।