

Never Give Up: हर किसी की जिंदगी में एक ऐसा दौर आता है, जब सबकुछ खत्म होता हुआ लगता है। परीक्षा की तैयारी हो, करियर में बदलाव, बिजनेस शुरू करने का सपना, फिटनेस का लक्ष्य या किसी मुश्किल दौर से बाहर निकलने की कोशिश, कई बार सबसे आसान रास्ता लगता है कि अब छोड़ देना चाहिए। लेकिन आज के दिन का संदेश इसी मोड़ पर खुद को दोबारा संभालने और आगे बढ़ने की याद दिलाता है।
हर साल 18 अगस्त को मनाया जाने वाला Never Give Up Day हार न मानने, हिम्मत बनाए रखने और कोशिश जारी रखने का संदेश देता है। 2026 में इस दिन के साथ वॉक ऑफ पर्सिवरेंस भी जुड़ा है, जिसमें लोग अपने किसी व्यक्ति, सपने, गोल के लिए वॉक करते हैं।
आज सोशल मीडिया मोटिवेशनल कोट्स से भरे पड़े हैं, लेकिन आज के दिन का उद्देश्य केवल बात करना नहीं है। इसका मकसद मोटिवेशन को एक्शन में बदलना है। जिसमें लोग अपने किसी व्यक्ति, सपने, लक्ष्य या उद्देश्य के लिए प्रतीकात्मक रूप से आगे की ओर बढ़ते हैं। वॉक ऑफ परसिवियरेंस के लिए कोई निश्चित दूरी या प्रतियोगिता जरूरी नहीं है। लोग अपने शहर, मोहल्ले, वर्कप्लेस, स्कूल, कॉलेज या ग्रुप में अपनी सुविधा के अनुसार इसमें शामिल हो सकते हैं।
भारत में हर दिन लाखों लोग किसी न किसी लक्ष्य के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं। कोई प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहा है, कोई करियर बदलने के लिए नया कौशल सीख रहा है, कोई कारोबार को दोबारा खड़ा कर रहा है और कोई अपने स्वास्थ्य या फिटनेस के लक्ष्य के लिए मेहनत कर रहा है। इसलिए नेवर गिव अप डे को सिर्फ एक विदेशी प्रेरणादायक विचार की तरह नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी की चुनौतियों से जोड़कर देखा जाना चाहिए।
प्रेरक वक्ता अर्ल नाइटिंगेल की एक चर्चित सीख है कि किसी सपने को सिर्फ इसलिए नहीं छोड़ना चाहिए क्योंकि उसे पूरा होने में समय लगेगा। समय तो वैसे भी बीतना है। अगर आप 30 या 40 की उम्र में कोई नया कोर्स, कौशल या करियर शुरू करना चाहते हैं, तो यह न सोचें कि इसमें कितना समय लगेगा। कुछ साल बाद समय बीत ही जाएगा। सवाल सिर्फ इतना है कि तब आपके पास नया कौशल और उपलब्धि होगी या नहीं।
हर दिन बहुत बड़ा काम करना जरूरी नहीं है। लगातार किए गए छोटे प्रयास भी लंबे समय में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। एक विद्यार्थी रोज दो घंटे पढ़ सकता है, कोई कामकाजी व्यक्ति रोज 30 मिनट नया स्किल सीख सकता है या कोई व्यक्ति रोज अपने हेल्थ पर काम कर सकता है। जरूरी यह है कि कोशिश रुकनी नहीं चाहिए।
साइंटिस्ट स्टीफन हॉकिंग ने सार्थक काम को जीवन में अर्थ और उद्देश्य से जोड़ा था। इसका मतलब यह नहीं कि व्यक्ति लगातार काम करता रहे और आराम या निजी जीवन को भूल जाए। सवाल यह है कि जो काम आप कर रहे हैं, क्या उसका कोई उद्देश्य है? आज के युवाओं के लिए करियर चुनते समय कमाई के साथ अपने काम का अर्थ समझना भी जरूरी है।
परीक्षा में असफल होना, नौकरी के लिए चयन न होना, बिजनेस आइडिया का कम न करना या कोई पर्सनल टारगेट का पूरा न होना पीछे रह जाना नहीं है। असफलता से मिला अनुभव अगली कोशिश को बेहतर बनाता है। हालांकि, हार न मानना और गलत रास्ते पर चलना, दो अलग-अलग बातें हैं।
नेवर गिव अप का मतलब यह नहीं कि हर चुनौती अकेले संभालनी है। परिवार, दोस्त, सहकर्मी और ग्रुप का साथ मुश्किल समय में काफी मायने रखता है। किसी दोस्त की परीक्षा की तैयारी में उसका साथ देना, करियर में असफलता के बाद सहकर्मी का हौसला बढ़ाना या किसी परिवार के सदस्य के कठिन समय में उसके साथ खड़े रहना भी सहयोग का हिस्सा है।