

Women's Day Health Awareness: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस केवल उत्सव का नहीं बल्कि आत्म-जागरूकता का भी दिन है। आधुनिक जीवनशैली और जैविक संरचना के कारण महिलाओं में कुछ बीमारियों का जोखिम पुरुषों से कहीं अधिक होता है। हड्डियों की कमजोरी से लेकर हृदय रोग तक स्वास्थ्य चुनौतियां हर महिला के लिए चिंता का विषय है।
स्वस्थ नारी, स्वस्थ परिवार यह जुमला सुनने में जितना अच्छा लगता है हकीकत में महिलाएं अपनी सेहत के प्रति उतनी ही लापरवाह होती हैं। अक्सर कमर दर्द, थकान या तनाव को सामान्य मानकर टाल दिया जाता है जो आगे चलकर गंभीर बीमारियों का रूप ले लेते हैं।
मेनोपॉज के बाद महिलाओं में एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर कम हो जाता है जिससे हड्डियां तेजी से कैल्शियम खोने लगती हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं को हड्डियों के टूटने और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा कहीं ज्यादा होता है। पीठ दर्द या झुकती हुई मुद्रा को नजरअंदाज न करें।
कैंसर महिलाओं के लिए एक बड़ा खतरा बना हुआ है। भारत में ब्रेस्ट कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। समय-समय पर 'सेल्फ एग्जामिनेशन' और मैमोग्राफी के जरिए इसका शुरुआती स्तर पर पता लगाया जा सकता है। वहीं पैप स्मीयर टेस्ट सर्वाइकल कैंसर के जोखिम को कम कर सकता है।
अक्सर माना जाता है कि दिल की बीमारियां पुरुषों को ज्यादा होती हैं, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि महिलाओं में हार्ट अटैक के लक्षण पुरुषों से अलग (जैसे अत्यधिक थकान या जबड़े में दर्द) होते हैं जिस कारण इसकी पहचान देरी से होती है। हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल पर नजर रखना अनिवार्य है।
PCOS/PCOD और थायराइड की समस्या महिलाओं में आम होती जा रही है। अचानक वजन बढ़ना, बालों का झड़ना या अनियमित पीरियड्स इसके संकेत हो सकते हैं। इसे नजरअंदाज करने से इनफर्टिलिटी और मानसिक तनाव जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
दोहरी जिम्मेदारी (घर और ऑफिस) के कारण महिलाएं मानसिक स्वास्थ्य के मोर्चे पर कमजोर पड़ जाती हैं। हार्मोनल बदलावों के कारण उनमें अवसाद का खतरा पुरुषों की तुलना में दोगुना होता है।
इस विमेंस डे पर उपहारों के साथ-साथ खुद को सेहत का उपहार दें। साल में एक बार फुल बॉडी चेकअप और संतुलित आहार को अपनी जीवनशैली का हिस्सा बनाएं। जब आप स्वस्थ होंगी तभी आपका परिवार सुरक्षित रहेगा।